Apollo Ingredients Shareholder Approval: ₹3 करोड़ के लीज पेमेंट पर शेयर होल्डर्स की हरी झंडी, पर रेगुलेटरी जांच जारी

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Apollo Ingredients Shareholder Approval: ₹3 करोड़ के लीज पेमेंट पर शेयर होल्डर्स की हरी झंडी, पर रेगुलेटरी जांच जारी
Overview

Apollo Ingredients Limited ने हाल ही में अपनी एक्स्ट्राऑर्डिनरी जनरल मीटिंग (EGM) में शेयर होल्डर्स से ₹5 करोड़ के राइट्स इश्यू (Rights Issue) फंड के इस्तेमाल को लेकर मंजूरी हासिल कर ली है। शेयर होल्डर्स ने ₹3 करोड़ को एक संबंधित कंपनी को एडवांस लीज पेमेंट (Advance Lease Payment) के तौर पर इस्तेमाल करने की औपचारिक अनुमति दे दी है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब कंपनी रेगुलेटरी जांच (Regulatory Scrutiny) के दायरे में है।

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शेयर होल्डर्स की मंजूरी का मतलब?

Apollo Ingredients के शेयर होल्डर्स ने 30 मार्च, 2026 को हुई खास मीटिंग में राइट्स इश्यू से जुटाए गए फंड के इस्तेमाल को मंजूरी दी। शेयर होल्डर्स ने ₹5 करोड़ में से ₹3 करोड़ को एक संबंधित पार्टी को एडवांस लीज पेमेंट के तौर पर इस्तेमाल करने को हरी झंडी दे दी। यह फैसला रिमोट ई-वोटिंग (Remote E-voting) के जरिए हुआ और मीटिंग के दौरान किसी भी शेयर होल्डर ने कोई सवाल नहीं पूछा।

इस वोट का महत्व इस बात में है कि यह राइट्स इश्यू के फंड के इस्तेमाल को औपचारिक रूप देता है, खासकर तब जब फंड के इस्तेमाल की योजना में बदलाव किया गया हो। यह निवेशकों का भरोसा बनाए रखने के लिए अहम है, क्योंकि फंड के इस्तेमाल में बदलाव, खासकर संबंधित पार्टियों को किए जाने वाले पेमेंट्स के मामले में, निवेशकों और रेगुलेटर्स का ध्यान आकर्षित करते हैं।

फंड का इस्तेमाल कैसे हुआ?

Apollo Ingredients ने जुलाई 2025 में राइट्स इश्यू के जरिए ₹5 करोड़ जुटाए थे। शुरुआत में इन पैसों का इस्तेमाल वर्किंग कैपिटल (Working Capital) के लिए होना था। हालांकि, बाद में इस राशि में से ₹3 करोड़ का इस्तेमाल 10 साल के लिए एक फैक्ट्री की लीज (Lease) के लिए किया गया। यह फैक्ट्री Apollo Ingredients India Private Limited नाम की एक संबंधित कंपनी से लीज पर ली गई है।

एक मॉनिटरिंग एजेंसी (Monitoring Agency) ने पहले भी फंड के इस्तेमाल में इस बदलाव पर आपत्ति जताई थी। हालांकि, शेयर होल्डर्स ने 27 सितंबर, 2025 को हुई पिछली एनुअल जनरल मीटिंग (AGM) में लीज को मंजूरी दे दी थी, लेकिन फंड के इस्तेमाल में यह बदलाव नोट किया गया था।

कंपनी अन्य रेगुलेटरी मामलों से भी जूझ रही है। जनवरी 2026 में, कंपनी ने बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) द्वारा सेबी (SEBI) लिस्टिंग नियमों के कथित उल्लंघन के लिए लगाए गए जुर्माने और संपत्ति फ्रीज के खिलाफ सिक्योरिटीज अपीलेट ट्रिब्यूनल (SAT) में अपील की थी। SAT ने फरवरी 2026 में कंपनी को कुछ राहत दी थी।

आगे क्या?

इस EGM में शेयर होल्डर्स की मंजूरी के बाद, संबंधित पार्टी को लीज पेमेंट के लिए ₹3 करोड़ के इस्तेमाल को अब औपचारिक रूप से मंजूरी मिल गई है। यह मीटिंग फंड के इस्तेमाल पर एक स्पष्ट निर्णय देती है, भले ही रेगुलेटरी जांच अभी भी जारी है।

निवेशकों के लिए मुख्य जोखिम फंड के इस्तेमाल में बदलाव और संबंधित पार्टियों को किए गए पेमेंट्स से जुड़े गवर्नेंस (Governance) के मुद्दे हैं। निवेशक कंपनी के नियमों के अनुपालन और SAT में चल रही अपील के नतीजों पर बारीकी से नजर रखेंगे। कंपनी को दो कारोबारी दिनों के भीतर वोटिंग के नतीजे और स्क्रूटिनाइजर की रिपोर्ट स्टॉक एक्सचेंजों को जमा करनी होगी।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.