Andhra Paper Kadiam Lockout: उत्पादन नुकसान का अनुमान बढ़कर **220 MT** हुआ, निवेशकों की बढ़ी चिंता

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
Andhra Paper Kadiam Lockout: उत्पादन नुकसान का अनुमान बढ़कर **220 MT** हुआ, निवेशकों की बढ़ी चिंता
Overview

Andhra Paper Ltd. ने अपने काकीनाडा (Kadiam) यूनिट में चल रहे लॉकआउट (lockout) के कारण उत्पादन नुकसान के अनुमान को काफी बढ़ा दिया है। कंपनी अब प्रतिदिन **220 मीट्रिक टन (MT)** के नुकसान का अनुमान लगा रही है, जो पहले **70 MT** था। यह बढ़कर **220 MT** का आंकड़ा **1 मई, 2026** से प्रभावित पूरे यूनिट की क्षमता को दर्शाता है।

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काकीनाडा यूनिट में बढ़ा संकट, उत्पादन 220 MT प्रतिदिन

Andhra Paper Ltd. ने अपनी काकीनाडा (Kadiam) यूनिट में चल रहे लॉकआउट (lockout) को लेकर एक महत्वपूर्ण अपडेट दिया है। कंपनी ने उत्पादन नुकसान के अपने अनुमान को 70 मीट्रिक टन (MT) प्रतिदिन से बढ़ाकर 220 MT प्रतिदिन कर दिया है। यह नया आंकड़ा 1 मई, 2026 को शुरू हुए लॉकआउट के कारण यूनिट की पूरी दैनिक उत्पादन क्षमता पर पड़े गंभीर असर को दर्शाता है। कंपनी ने 5 मई, 2026 को यह जानकारी दी। इससे पहले, 27 अप्रैल, 2026 से यूनिट में कॉन्ट्रैक्ट वर्कर्स की हड़ताल चल रही थी, जो 1 मई को लॉकआउट में बदल गई। शुरुआती 70 MT प्रतिदिन का अनुमान केवल आंशिक रुकावट पर आधारित था।

नुकसान का पैमाना और असर

उत्पादन नुकसान के अनुमान में 70 MT से 220 MT तक की यह भारी बढ़ोतरी काकीनाडा यूनिट में गंभीर ऑपरेशनल प्रॉब्लम का संकेत देती है। इस यूनिट की सालाना कैपेसिटी करीब 73,150 MT है, जिसका मतलब है कि एक दिन का पूरा उत्पादन ठप होना इसकी सालाना क्षमता का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। कंपनी की कुल सालाना पेपर कैपेसिटी 250,000 MTPA से ज्यादा है, जिसमें काकीनाडा यूनिट का योगदान काफी अहम है। यदि यह रुकावट लंबी खिंचती है, तो कंपनी के रेवेन्यू और नेट प्रॉफिट पर बड़ा असर पड़ सकता है।

पिछली लेबर डिस्प्यूट्स का इतिहास

Andhra Paper के लिए यह कोई नई बात नहीं है। कंपनी पहले भी लेबर से जुड़े मामलों के कारण ऑपरेशनल दिक्कतों का सामना कर चुकी है। अप्रैल 2024 में, इसके राजमुंदरी (Rajahmundry) यूनिट में वेज पॉलिसी और यूनियन चुनावों को लेकर लॉकआउट हुआ था। इससे भी पहले, जनवरी 2025 में, राजमुंदरी प्लांट में एक बड़ी हड़ताल हुई थी, जिससे प्रतिदिन 510 MT का भारी प्रोडक्शन लॉस हुआ था। मौजूदा काकीनाडा का मामला 27 अप्रैल, 2026 को कॉन्ट्रैक्ट वर्कर्स की हड़ताल से शुरू हुआ और अब यह लॉकआउट में तब्दील हो गया है।

निवेशकों के लिए जोखिम

उत्पादन नुकसान के बढ़े हुए आंकड़े से साफ है कि काकीनाडा यूनिट में कामकाज पूरी तरह ठप हो गया है। इन्वेस्टर्स अब इस लॉकआउट की अवधि और इसे सुलझाने की दिशा में कंपनी के प्रयासों पर बारीकी से नजर रखेंगे। इस स्थिति में लगातार प्रोडक्शन लॉस का जोखिम है, जो कंपनी की कमाई और मुनाफे को काफी प्रभावित कर सकता है। इसके अलावा, लेबर अशांति से कंपनी की मार्केट पोजीशन और इन्वेस्टर्स के भरोसे को नुकसान पहुंचने का खतरा भी है, साथ ही यह कंपनी की ग्राहकों की मांग पूरी करने की क्षमता को भी परखेगा।

इंडस्ट्री के प्रतिस्पर्धी

Andhra Paper भारतीय पेपर मार्केट में JK Paper Limited, ITC Paperboards, और Tamilnadu Newsprint and Papers Limited (TNPL) जैसी कंपनियों के साथ प्रतिस्पर्धा करती है। इसकी पैरेंट कंपनी West Coast Paper Mills Limited भी इसी तरह की चुनौतियों का सामना करती है। हालांकि लेबर डिस्प्यूट्स किसी भी इंडस्ट्री में हो सकते हैं, लेकिन Andhra Paper के मामले में बार-बार ऐसी समस्याएं यह दर्शा सकती हैं कि इसकी इंटरनल चुनौतियां वैसी कंपनियों से अलग हैं जिनके लेबर रिलेशन ज्यादा स्टेबल हैं।

कंपनी के मुख्य मैट्रिक्स

आंकड़ों के अनुसार, Andhra Paper की काकीनाडा यूनिट की सालाना पेपर प्रोडक्शन कैपेसिटी फाइनेंशियल ईयर 2024 तक लगभग 73,150 MTPA थी। कंपनी की कुल इंस्टॉल्ड पेपर प्रोडक्शन कैपेसिटी 240,000 से 259,400 MTPA (FY24-25) के बीच है। मार्च 2025 में समाप्त हुए फाइनेंशियल ईयर में, कंपनी ने ₹1,630 करोड़ का रेवेन्यू और ₹89 करोड़ का नेट प्रॉफिट दर्ज किया था। 30 सितंबर, 2025 तक, Andhra Paper के पास ₹650 करोड़ से अधिक का कैश और शॉर्ट-टर्म इन्वेस्टमेंट था।

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