YES Bank ने 1% ROA के लक्ष्य को किया हासिल: FY26 के नतीजे शानदार
YES Bank ने पूरे फाइनेंशियल ईयर (FY26) के लिए ₹3,476 करोड़ का नेट प्रॉफिट दर्ज किया है, जो पिछले साल की तुलना में 44.5% की जोरदार बढ़ोतरी है। बैंक ने चौथी तिमाही (Q4 FY26) के लिए 1% Return on Assets (ROA) का अपना अहम लक्ष्य भी पूरा कर लिया है, जबकि पूरे साल का ROA 0.8% रहा।
बैंक के Net Interest Margins (NIMs) में साल-दर-साल 20 बेसिस पॉइंट का सुधार हुआ और यह FY26 में 2.6% रहा, जबकि Q4 FY26 में यह 2.7% था। इसके अलावा, बैंक ने अनिवार्य RIDF डिपॉजिट को अपने एसेट्स का 6% तक कम कर दिया है, जो पिछले साल 9% था। यह बेहतर फंडिग मिक्स और लागत प्रबंधन का संकेत देता है।
एसेट क्वालिटी में भी लगातार सुधार देखा गया है। Gross Non-Performing Assets (GNPA) घटकर 1.3% पर आ गए और Net Non-Performing Assets (NNPA) 0.2% रहे। Provision Coverage Ratio (PCR) 81.9% पर मजबूत बना हुआ है।
कुल एडवांसेज (Advances) 11.1% बढ़कर ₹2.73 लाख करोड़ हो गए, जबकि कुल डिपॉजिट 12.1% बढ़कर ₹3.18 लाख करोड़ पर पहुंच गए। CASA रेशियो FY26 के अंत तक 35.1% रहा।
YES Bank के लिए क्यों मायने रखते हैं ये नतीजे?
1% ROA का लक्ष्य हासिल करना YES Bank के लिए एक बड़ी उपलब्धि है, जो रीस्ट्रक्चरिंग के बाद से बैंक की टिकाऊ Profitability बनाने की प्रगति को दर्शाता है। बेहतर NIMs और मजबूत डिपॉजिट ग्रोथ स्वस्थ बैलेंस शीट और फंडिंग लागत के कुशल प्रबंधन को दर्शाते हैं।
स्थिर एसेट क्वालिटी, जिसमें GNPA 2% से काफी नीचे है, यह बताता है कि बैंक का Risk Management परिपक्व हो रहा है और रिटेल व MSME लेंडिंग पर उसका फोकस कारगर साबित हो रहा है।
YES Bank का टर्नअराउंड सफर
कई साल पहले लगभग डूबने की कगार पर पहुंचने के बाद से YES Bank एक बड़े टर्नअराउंड से गुजर रहा है। इस प्रयास में बड़े पैमाने पर कैपिटल इंफ्यूजन, मैनेजमेंट में बदलाव और रिटेल डिपॉजिट बेस को मजबूत करने व लोन बुक की क्वालिटी सुधारने पर रणनीतिक बदलाव शामिल रहे हैं। बैंक ने लीगेसी नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स को कम करने और अधिक लचीला बिजनेस मॉडल बनाने पर काम किया है।
निवेशकों को क्या देखना चाहिए?
शेयरधारकों को Profitability पर लगातार फोकस की उम्मीद करनी चाहिए, क्योंकि मैनेजमेंट FY27 में ROA को और बेहतर बनाने का लक्ष्य रखता है। बैंक की 13-15% लोन ग्रोथ की गाइडेंस इंडस्ट्री के औसत के अनुरूप है, जो सामान्य विस्तार की ओर वापसी का संकेत देती है। अनिवार्य RIDF डिपॉजिट में और कमी से अधिक लागत प्रभावी स्रोतों के साथ फंडिंग मिक्स में सुधार की उम्मीद है।
लगातार कम GNPA स्तर जोखिम प्रबंधन की प्रभावीतता को दर्शाता है। निवेशक पर्सनल लोन और क्रेडिट कार्ड में स्लिपेज (Slippages) पर भी नज़र रखेंगे, जो Q4 FY26 में क्रमशः ₹160 करोड़ और ₹135-140 करोड़ थे। बैंक सालाना लगभग 80 नई शाखाएं खोलने की योजना बना रहा है।
मुख्य जोखिम और अनिश्चितताएं
सबसे बड़ा कानूनी जोखिम AT1 बॉन्ड के राइटडाउन (Writedown) पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला बना हुआ है। प्रतिकूल निर्णय से महत्वपूर्ण, हालांकि वर्तमान में अनिश्चित, वित्तीय प्रभाव पड़ सकते हैं। मैक्रोइकोनॉमिक अस्थिरता, जिसमें भू-राजनीतिक संघर्ष और मूल्य में उतार-चढ़ाव शामिल हैं, संभावित मुद्रास्फीति दबाव भी पैदा कर सकते हैं जो मार्जिन और एसेट क्वालिटी को प्रभावित कर सकते हैं।
मैनेजमेंट भू-राजनीतिक घटनाओं से MSME सेगमेंट पर पड़ने वाले किसी भी प्रभाव की बारीकी से निगरानी कर रहा है, हालांकि वर्तमान में कोई तनाव नहीं दिख रहा है। पश्चिम एशिया संघर्ष जैसे भू-राजनीतिक कारक भी MSME सेगमेंट पर उनके प्रभाव के लिए देखे जा रहे हैं।
पीयर परफॉर्मेंस की तुलना
YES Bank का FY26 ROA 0.8% (पूरा साल) और 1% (Q4) प्रमुख प्राइवेट बैंकिंग पीयर्स के FY24/FY25 के 1.9% से 2.6% की तुलना में कम है। इसी तरह, YES Bank का FY26 NIM 2.6% पीयर्स की सामान्य 4.1% से 5.2% की रेंज से नीचे है, हालांकि बैंक संरचनात्मक सुधार का लक्ष्य रखता है। एसेट क्वालिटी (GNPA 1.3%) सुधर रही है और कुछ पीयर्स जैसे Kotak Mahindra Bank (1.42% Q4FY25) और Axis Bank (1.28% Q4FY25) के तुलनीय है, लेकिन HDFC Bank (1.15% Q4FY26) और ICICI Bank (1.53% Q3FY26) से अधिक है।
