West Leisure Resorts Limited अपने बोर्ड और कमेटियों की संरचना में एक बड़ा फेरबदल कर रहा है। ये सभी महत्वपूर्ण बदलाव 31 मार्च 2026 से लागू होने शुरू हो जाएंगे, जिसके तहत कंपनी में एक नई अतिरिक्त डायरेक्टर की नियुक्ति की जाएगी और दो डायरेक्टर अपने पद से इस्तीफा देंगे। इसके अतिरिक्त, 1 अप्रैल 2026 से कंपनी की अहम बोर्ड कमेटियों का भी पुनर्गठन किया जाएगा।
इस फेरबदल के तहत, मिसेज राधा चोटालिया को नॉन-एग्जीक्यूटिव कैटेगरी में एडिशनल डायरेक्टर के तौर पर नियुक्त किया गया है। वहीं, मिस्टर सत्यनारायण खुर्री की भूमिका को एग्जीक्यूटिव एडिशनल डायरेक्टर से बदलकर नॉन-एग्जीक्यूटिव एडिशनल डायरेक्टर कर दिया गया है।
दूसरी ओर, मिसेज अस्मिता अचरेकर और मिस्टर अमित मूना ने निजी कारणों का हवाला देते हुए नॉन-एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर के पद से इस्तीफा दे दिया है। इन इस्तीफों के बाद, कंपनी की ऑडिट कमेटी और नॉमिनेशन एंड रेमुनरेशन कमेटी का नए सिरे से गठन किया गया है, जो 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी होगा।
कंपनी के बैकग्राउंड की बात करें तो, West Leisure Resorts Limited, जिसकी स्थापना 2008 में हुई थी, अब एक कोर इन्वेस्टमेंट कंपनी (CIC) के तौर पर काम कर रही है। यह मैनपावर सप्लाई, इन्वेस्टमेंट और लेंडिंग जैसी फाइनेंशियल एक्टिविटीज पर फोकस करती है और BSE पर लिस्टेड है। हाल ही में, कंपनी में अन्य अहम मैनेजमेंट बदलाव भी हुए हैं। जनवरी 2026 में मिस्टर वैभव डोडिया ने कंपनी सेक्रेटरी और कंप्लायंस ऑफिसर के पद से इस्तीफा दिया था, जबकि मार्च 2026 में मिस्टर सी. के. खैतान ने मैनेजर और सीएफओ (CFO) के पद से इस्तीफा दिया था, दोनों ने ही निजी कारण बताए थे। इसके अतिरिक्त, अप्रैल 2021 में SEBI ने Anurag Benefit Trust को उसके महत्वपूर्ण शेयर अधिग्रहण के संबंध में एक खास छूट दी थी।
बोर्ड में ये बदलाव कंपनी की गवर्नेंस और रणनीतिक दिशा के लिए बेहद अहम हैं। एक नए डायरेक्टर की नियुक्ति से नई विशेषज्ञता और दृष्टिकोण मिलने की उम्मीद है, जबकि डायरेक्टरों के इस्तीफे से बोर्ड की जिम्मेदारियों में समायोजन की जरूरत पड़ सकती है। पुनर्गठित कमेटियां अब नए सदस्यों के साथ काम करेंगी, जिससे उनके निरीक्षण और निर्णय लेने की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।
वैसे तो ये बदलाव कंपनी के लिए महत्वपूर्ण हैं, लेकिन डायरेक्टर्स के इस्तीफे से रणनीतिक योजना में निरंतरता बनाए रखने की चुनौती आ सकती है। एक साथ कई इस्तीफे गवर्नेंस में संभावित कमजोरियों को बढ़ा सकते हैं, जिस पर नियामकों जैसे SEBI और स्टॉक एक्सचेंजों की नजर रह सकती है।