बोर्ड में हलचल और वित्तीय दबाव
यह इस्तीफे दिसंबर 2025 में हुई एक बड़ी बोर्ड रीस्ट्रक्चरिंग (board restructuring) के बाद हुए हैं, जिसने कंपनी के भीतर चल रही उथल-पुथल को उजागर किया है। इन डायरेक्टर्स के जाने से कंपनी के गवर्नेंस (governance) पर सवाल खड़े हो रहे हैं, खासकर तब जब यह लिक्विडिटी क्रंच (liquidity crunch) और बड़ी देनदारियों के बोझ तले दबी हुई है।
वित्तीय प्रदर्शन और ऑडिटर्स की चिंता
Vardhan Capital ने फाइनेंशियल ईयर 2025 की दूसरी तिमाही (Q2 FY2025) में ₹1.52 लाख का नेट लॉस (net loss) दर्ज किया था। कंपनी के ऑडिटर ने 13 फरवरी 2026 को हुई बोर्ड मीटिंग में यह भी बताया था कि कंपनी पर काफी स्टैचुटरी ड्यूज़ लंबित हैं और वह भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के नियमों का पूरी तरह से पालन नहीं कर रही है। कंपनी ने कहा है कि वह आरबीआई फाइलिंग को नियमित करने और पूर्ण अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए काम कर रही है।
खाली सीटें और भविष्य की राह
इन इस्तीफों के बाद, Vardhan Capital को एक नॉन-एग्जीक्यूटिव, नॉन-इंडिपेंडेंट डायरेक्टर और दो नॉन-एग्जीक्यूटिव, इंडिपेंडेंट डायरेक्टर्स के पदों को भरना होगा। लगातार बोर्ड अस्थिरता कंपनी की रणनीतियों को लागू करने में बाधा डाल सकती है। बकाया देनदारियों का भुगतान करना, आरबीआई अनुपालन सुनिश्चित करना और लिक्विडिटी की स्थिति को संभालना कंपनी के लिए सर्वोच्च प्राथमिकताएं हैं।
एनबीएफसी (NBFC) रेगुलेटरी माहौल
एक नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी (NBFC) के तौर पर, Vardhan Capital भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के कड़े नियमों के तहत आती है। ऐसे में एक स्थिर और मजबूत बोर्ड कंपनी के लिए निवेशकों का भरोसा बनाए रखने और जोखिमों का प्रबंधन करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। निवेशकों की नजरें नए डायरेक्टर्स की नियुक्ति पर टिकी रहेंगी, जो कंपनी को इन वित्तीय चुनौतियों से निकालने में मदद कर सकें।
