Utkarsh SFB: ₹1,491 करोड़ के फंसे कर्ज़ बेचे! बैलेंस शीट हुई क्लीन, निवेशक खुश?

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
Utkarsh SFB: ₹1,491 करोड़ के फंसे कर्ज़ बेचे! बैलेंस शीट हुई क्लीन, निवेशक खुश?
Overview

Utkarsh Small Finance Bank के मैनेजमेंट ने एक बड़ा फैसला लेते हुए **₹1,491 करोड़** के फंसे और राइट-ऑफ किए गए कर्ज़ (bad and written-off loans) एक एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनी (ARC) को बेचने की मंजूरी दे दी है।

Utkarsh SFB की बैलेंस शीट से बड़ी सफाई: ₹1,491 करोड़ के NPA ARC को बेचे

Utkarsh Small Finance Bank (USFBL) ने ₹1,016.24 करोड़ (पूल 1) और ₹474.75 करोड़ (पूल 2) के नॉन-परफॉर्मिंग (NPA) और राइट-ऑफ किए गए कर्ज़ को एक एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनी (ARC) को बेचने के लिए सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है।

डील की पूरी जानकारी

बैंक की मैनेजमेंट कमेटी ने 26 मार्च 2026 को हुई बैठक में इन अनसिक्योर्ड (unsecured) माइक्रोफाइनेंस इंस्टीट्यूशन (MFI) कर्ज़ों के दो हिस्सों (pools) को बेचने का फैसला किया। पहले पूल में ₹1,016.24 करोड़ के प्रिंसिपल आउटस्टैंडिंग वाले लोन थे, जिनकी रिजर्व प्राइस ₹133.10 करोड़ रखी गई थी। वहीं, दूसरे पूल में ₹474.75 करोड़ के कर्ज़ थे, जिनकी रिजर्व प्राइस ₹62.19 करोड़ थी। दोनों पूल की कुल रिजर्व प्राइस ₹195.29 करोड़ है। यह डील बैंक की बैलेंस शीट से खराब एसेट्स को हटाकर उसे साफ-सुथरा बनाने की रणनीति का एक अहम हिस्सा है।

Utkarsh SFB पर क्या होगा असर?

इस कदम से Utkarsh SFB की एसेट क्वालिटी (asset quality) से जुड़ी चिंताओं को दूर करने में मदद मिलेगी। इन NPA को बेचकर बैंक अपने ग्रॉस नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (GNPA) और नेट नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (NNPA) जैसे अहम रेशियो को बेहतर बनाने का लक्ष्य रखता है। इससे प्रोविजनिंग (provisioning) की ज़रूरत कम हो सकती है और बैंक की वित्तीय सेहत व निवेशकों का भरोसा बढ़ सकता है।

एसेट क्वालिटी की पुरानी मुश्किलें

Utkarsh SFB को खासकर माइक्रो-बैंकिंग पोर्टफोलियो में एसेट क्वालिटी की भारी गिरावट का सामना करना पड़ा है। फाइनेंशियल ईयर 2026 की तीसरी तिमाही तक ग्रॉस NPA 12.42% तक पहुँच गया था, जो मार्च 2024 के 2.51% से काफी ज्यादा है। यह पहली बार नहीं है जब बैंक खराब एसेट्स से छुटकारा पाने की कोशिश कर रहा है। इससे पहले, दिसंबर 2024 में Utkarsh SFB ने ₹355 करोड़ के NPA एक ARC को ₹52 करोड़ में बेचे थे। वहीं, सितंबर 2025 में ₹24 करोड़ के NPA ₹11.40 करोड़ में बेचे गए थे। बैंक को हाल की तिमाहियों में भारी नेट लॉस (net loss) भी हुआ है, जिससे निवेशकों का भरोसा कम हुआ है और रेटिंग एजेंसियों ने भी नेगेटिव आउटलुक दिया है। अप्रैल 2024 में, बैंक ने SEBI को डिस्क्लोजर नियमों के उल्लंघन के मामले में ₹1.24 करोड़ का जुर्माना भी भरा था। इन दबावों के बीच, Utkarsh SFB अपनी लोन बुक को भी डाइवर्सिफाई (diversify) कर रहा है, और MSME व हाउसिंग लोन जैसे सिक्योर्ड सेगमेंट पर फोकस बढ़ा रहा है।

क्या हैं उम्मीदें?

इस बिक्री से बैंक के रिपोर्टेड GNPA और NNPA रेशियो में सीधे कमी आएगी, जिससे उसकी बैलेंस शीट और साफ होगी और Utkarsh SFB निवेशकों के लिए ज़्यादा आकर्षक बन सकता है। तनावग्रस्त एसेट्स में कमी से भविष्य में प्रोविजनिंग का बोझ भी कम हो सकता है, जिससे बैंक अपने मुख्य कामकाज और नई लोन देने की संभावनाओं पर ज़्यादा ध्यान केंद्रित कर सकेगा।

संभावित जोखिम

हालांकि, ARC से मिलने वाली राशि बोली प्रक्रिया (bidding process) और बाज़ार की मौजूदा स्थिति पर निर्भर करेगी। बाकी बचे लोन बुक, खासकर माइक्रोफाइनेंस सेगमेंट में, तनाव की लगातार निगरानी करना अहम होगा। इस बड़े पैमाने की एसेट बिक्री को कुशलता से पूरा करने में भी एग्जीक्यूशन रिस्क (execution risk) शामिल है। भविष्य में ऐसी समस्याओं से बचने के लिए लोन बुक में तनाव के मूल कारणों को दूर करना ज़रूरी है।

साथियों से तुलना

Utkarsh SFB का मौजूदा GNPA रेशियो 12.42% (Q3 FY26 तक) स्मॉल फाइनेंस बैंक (SFB) सेक्टर के औसत 3.8% (FY25) की तुलना में काफी ज़्यादा है। यह भारतीय बैंकिंग सेक्टर के मुकाबले बहुत अलग है, जहाँ FY25 तक GNPA रेशियो मल्टी-डिकेड लो 1.9-2.2% पर आ गए थे। AU Small Finance Bank जैसे बैंक 11.98% के पॉजिटिव रिटर्न ऑन इक्विटी (ROE) के साथ मजबूत मुनाफे में हैं, जबकि Utkarsh SFB को भारी नुकसान और नेगेटिव ROE झेलना पड़ रहा है, जो प्रदर्शन के अंतर को दर्शाता है।

मुख्य वित्तीय मेट्रिक्स

  • ग्रॉस NPA रेशियो: 12.42% (Q3 FY26 तक)।
  • नेट NPA रेशियो: 5.02% (Q3 FY26 तक)।
  • GNPA पर प्रोविजन कवरेज रेशियो (PCR): 63% (सितंबर 2025 तक)।
  • SFB सेक्टर औसत GNPA: लगभग 3.8% (FY25)।

आगे क्या और निवेशकों को क्या देखना है

भविष्य में, बैंक ARCs से एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (EOI) आमंत्रित करने के लिए अखबारों में विज्ञापन देगा। निवेशक बोली प्रक्रिया और ARC से मिलने वाली अंतिम राशि पर बारीकी से नज़र रखेंगे। बैंक के NPA रेशियो और कुल लाभप्रदता पर वास्तविक प्रभाव का आकलन करने के लिए भविष्य के तिमाही नतीजों के साथ-साथ लोन पोर्टफोलियो के डाइवर्सिफिकेशन और बाकी बचे तनावग्रस्त एसेट्स के प्रबंधन में प्रगति की समीक्षा महत्वपूर्ण होगी।

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