Q4 FY26 में Utkarsh Small Finance Bank को ₹188 करोड़ का जो नेट लॉस (Net Loss) हुआ है, उसकी बड़ी वजह पुराने JLG (माइक्रोफाइनेंस) लोन पर की गई भारी प्रोविजनिंग (provisioning) है। बैंक अपने बैलेंस शीट को मजबूत करने और भविष्य में एसेट क्वालिटी (asset quality) को बेहतर बनाने के लिए यह कदम उठा रहा है।
सबसे अच्छी बात यह है कि नए NPA स्लिपेज (slippages) में भारी कमी आई है। यह पिछले साल के ₹710 करोड़ की तुलना में घटकर करीब ₹170 करोड़ रह गया है। यह दिखाता है कि बैंक अपने पुराने NPA मुद्दों को सुलझा रहा है और नए, अधिक सुरक्षित लोन पोर्टफोलियो (portfolio) अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं।
रणनीति में बदलाव और एसेट क्वालिटी में सुधार:
यह तिमाही लॉस जरूरी था ताकि बैंक अपनी बैलेंस शीट को मजबूत कर सके। NPA स्लिपेज में आई कमी इस बात का संकेत है कि बैंक सही दिशा में आगे बढ़ रहा है।
सिक्योर्ड लेंडिंग पर फोकस:
बैंक अब सिक्योर्ड लेंडिंग (secured lending) पर अपना फोकस बढ़ा रहा है, जो अब कुल लोन बुक का 51% हो गया है। यह बैंक के लिए एक बड़ा रणनीतिक बदलाव है।
भविष्य की योजनाएं:
बैंक का लक्ष्य FY28 तक 15% का रिटर्न ऑन इक्विटी (ROE) हासिल करना है। इस साफ-सुथरी बैलेंस शीट के साथ, Utkarsh SFB अब 25-30% तक के लोन ग्रोथ (loan growth) का लक्ष्य हासिल करने के लिए बेहतर स्थिति में है। FY28 तक नेट NPA (Net NPA) को 1% से नीचे लाने का भी अनुमान है।
चुनौतियां:
'व्हील्स' (Wheels) यानी व्हीकल लोन पोर्टफोलियो अभी भी बैंक के रिटेल एसेट क्वालिटी के लिए एक चुनौती बना हुआ है। एक-ऑफ खर्चों (one-off expenses) जैसे लेबर कोड और ESOPs ने भी हाल की तिमाहियों को प्रभावित किया है।
प्रतिस्पर्धी माहौल:
Utkarsh SFB, AU Small Finance Bank और Equitas Small Finance Bank जैसे अन्य स्मॉल फाइनेंस बैंकों के साथ प्रतिस्पर्धा करता है।
मुख्य वित्तीय आंकड़े:
Q4 FY26 में नेट लॉस ₹188 करोड़ रहा। ताजा NPA स्लिपेज ₹170 करोड़ रहे, जबकि Q4 FY25 में यह ₹710 करोड़ थे। सिक्योर्ड लेंडिंग अब 51% है, जबकि JLG एक्सपोजर 28% पर आ गया है। CASA रेश्यो बढ़कर 24% हो गया, और फंड की लागत (cost of funds) घटकर 7.9% हो गई।