यह कदम SEBI की 'प्रोहिबिशन ऑफ इनसाइडर ट्रेडिंग (PIT)' गाइडलाइन्स का पालन करने के लिए उठाया गया है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बैंक के अंदरूनी लोग, जैसे डायरेक्टर्स (Directors) और प्रमुख कर्मचारी (Key Employees), जो कंपनी की वित्तीय स्थिति के बारे में गोपनीय (non-public) और मूल्य-संवेदनशील (price-sensitive) जानकारी रखते हैं, वे इस जानकारी का गलत फायदा उठाकर शेयर्स (Securities) का ट्रेड न कर सकें। इस तरह, सभी निवेशकों के लिए एक समान और पारदर्शी माहौल बना रहता है।
बैंक के अनुसार, ट्रेडिंग विंडो तब तक बंद रहेगी जब तक कि 31 मार्च, 2026 को समाप्त होने वाले वित्तीय वर्ष के ऑडिटेड फाइनेंशियल रिजल्ट्स की आधिकारिक घोषणा नहीं हो जाती, और उसके बाद 48 घंटे का समय पूरा नहीं हो जाता।
यह ध्यान देने वाली बात है कि ट्रेडिंग विंडो को कब दोबारा खोला जाएगा, इसकी निश्चित तारीख अभी तय नहीं है। ऐसा इसलिए है क्योंकि बैंक के बोर्ड की वह मीटिंग, जिसमें FY2025-26 के ऑडिटेड फाइनेंशियल स्टेटमेंट को अंतिम मंजूरी दी जानी है, उसका शेड्यूल अभी जारी नहीं हुआ है।
इस 'ब्लैकआउट पीरियड' (Blackout Period) के दौरान, यूनियन बैंक के नामित अधिकारी (designated persons) और उनके तत्काल परिजन (immediate relatives) भी बैंक के सिक्योरिटीज में कोई भी लेन-देन नहीं कर सकते।
यह प्रक्रिया भारतीय बैंकिंग क्षेत्र में काफी आम है। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (State Bank of India), पंजाब नेशनल बैंक (Punjab National Bank), और एचडीएफसी बैंक (HDFC Bank) जैसे कई प्रमुख बैंक भी अपने तिमाही या सालाना नतीजों से पहले इसी तरह की ट्रेडिंग विंडो क्लोजर अपनाते हैं।
निवेशकों को सलाह दी जाती है कि वे बैंक द्वारा बोर्ड मीटिंग की तारीख के बारे में की जाने वाली आगामी घोषणाओं पर नजर रखें। नतीजों के सार्वजनिक होने के बाद ही ट्रेडिंग विंडो के फिर से खुलने का समय स्पष्ट हो पाएगा।
