कैपिटल बेस बढ़ाने की तैयारी
U GRO CAPITAL ने अपने कैपिटल बेस को मजबूत करने और MSME सेक्टर के लिए लेंडिंग ऑपरेशंस को और बढ़ावा देने के लिए ₹205 करोड़ जुटाने का प्लान बनाया है। कंपनी की इन्वेस्टमेंट एंड बॉरोइंग कमेटी ने इस फंड को नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर्स (NCDs) के जरिए प्राइवेट प्लेसमेंट पर जारी करने की मंजूरी दे दी है। यह कदम कंपनी की फाइनेंसियल पोजीशन को और मजबूत करेगा।
NCDs की डिटेल्स
21 मार्च 2026 को हुई बोर्ड मीटिंग में, U GRO CAPITAL की कमेटी ने NCDs जारी करने की मंजूरी दी। इसमें दो तरह के डिबेंचर्स शामिल हैं:
- सीरीज 1: ये सीनियर, सिक्योर्ड NCDs होंगे जिनकी टेन्योर 12 महीने और 22 दिन की होगी। इन पर 9.50% का इंटरेस्ट रेट मिलेगा, जिसका भुगतान हर महीने किया जाएगा।
- सीरीज 2: ये अनसिक्योर्ड, सबऑर्डिनेटेड NCDs होंगे जिनकी टेन्योर 72 महीने तक हो सकती है। इन पर 13.25% का काफी ऊंचा इंटरेस्ट रेट मिलेगा, जिसका भुगतान छमाही आधार पर होगा।
हालांकि, इन सीरीज के लिए कुल इश्यू कैपेसिटी ₹1,550 करोड़ और ₹500 करोड़ है, लेकिन मौजूदा मंजूरी सिर्फ ₹205 करोड़ के फंड जुटाने तक सीमित है। यह दिखाता है कि इस बार केवल एक हिस्सा ही इस्तेमाल किया जाएगा। अलॉटमेंट की टेंटेटिव डेट 27 मार्च 2026 रखी गई है।
लेंडिंग क्षमता को बढ़ावा
यह फंड जुटाना U GRO CAPITAL के लिए काफी अहम है। इससे कंपनी की फाइनेंसियल ताकत बढ़ेगी और कंपीटिटिव MSME लेंडिंग सेक्टर में ग्रोथ के लिए जरूरी रिसोर्सेज मिलेंगे। NCDs के इस इश्यू से कंपनी के डेट-टू-इक्विटी रेशियो (Debt-to-Equity Ratio) और फाइनेंसियल लीवरेज (Financial Leverage) पर भी असर पड़ेगा।
हाल की गतिविधियां
U GRO CAPITAL, जो कि MSME लेंडिंग पर फोकस करने वाली एक टेक-ड्रिवेन NBFC है, ने हाल ही में 18 मार्च 2026 को ₹45 करोड़ के NCDs प्राइवेट प्लेसमेंट से अलॉट किए थे। फरवरी 2026 में, कंपनी ने इमर्जिंग मार्केट सिक्योर्ड लेंडिंग और एम्बेडेड मर्चेंट फाइनेंस पर फोकस करते हुए बिजनेस री-अलाइनमेंट (Business Realignment) की घोषणा की थी। साथ ही, कंपनी ने हाल ही में Profectus Capital Private Limited को ₹1,398.60 करोड़ में एक्वायर किया था, जिसका मकसद MSME लेंडिंग सेक्टर में अपनी पोजीशन को और मजबूत करना है।
आगे क्या देखना है
- ₹205 करोड़ के फंड के लिए फाइनल इन्वेस्टर कमिटमेंट्स और अलॉटमेंट का विवरण।
- नई पूंजी का इस्तेमाल AUM (Assets Under Management) और प्रॉफिटेबिलिटी को बढ़ाने के लिए कैसे किया जाता है।
- स्ट्रेटेजिक री-अलाइनमेंट और कॉस्ट-सेविंग प्लान्स पर कंपनी के अपडेट्स।
