Tokyo Finance Ltd ने 31 मार्च 2026 को समाप्त अवधि के लिए अपना तिमाही कंप्लायंस सर्टिफिकेट पेश किया है। इसके जरिए कंपनी ने SEBI (डिपॉजिटरी और पार्टिसिपेंट्स) रेगुलेशन, 2018 के तहत नियमों के पालन की पुष्टि की है।
इस फाइलिंग में कंपनी की जारी की गई शेयर पूंजी (issued share capital) का ब्योरा भी दिया गया है, जिसमें कुल 69,70,100 शेयर शामिल हैं। इनमें से 42,68,669 शेयर (61.24%) CDSL में, 18,49,831 शेयर (26.54%) NSDL में और 8,51,600 शेयर (12.22%) अभी भी फिजिकल फॉर्म में हैं।
हालांकि, इस रिपोर्ट का सबसे अहम हिस्सा कंपनी का वो डी-लिस्टिंग (de-listing) का लंबित आवेदन है, जिसे अहमदाबाद स्टॉक एक्सचेंज से बाहर निकलने के लिए 1999 में शेयरहोल्डर्स (shareholders) से मंजूरी मिली थी। लेकिन, दो दशक से भी ज्यादा समय बीत जाने के बाद भी यह प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई है।
रिपोर्ट में शेयर पूंजी के आंकड़ों में एक मामूली अंतर का भी जिक्र है। मिनिस्ट्री ऑफ कॉर्पोरेट अफेयर्स (MCA) के मुताबिक कंपनी के पास 69,42,800 शेयर हैं, जबकि स्टॉक एक्सचेंज के आंकड़े 69,70,100 शेयर दिखाते हैं। इस अंतर की वजह आंशिक रूप से भुगतान किए गए शेयर (partly paid-up shares) बताए गए हैं।
Tokyo Finance Ltd एक नॉन-डिपॉजिट टेकिंग नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी (NBFC) के तौर पर रजिस्टर है, जो मुख्य रूप से निवेश और क्रेडिट ऑपरेशंस पर ध्यान केंद्रित करती है। 1999 में शेयरहोल्डर्स द्वारा मंजूर की गई डी-लिस्टिंग की यह लंबित अर्जी एक बड़ा अनसुलझा प्रशासनिक मामला बनी हुई है।
शेयरहोल्डर्स के लिए, यह फाइलिंग SEBI के डिपोजिटरी नियमों के प्रति कंपनी के अनुपालन को कन्फर्म करती है। साथ ही, यह लंबित डी-लिस्टिंग की याद दिलाती है, जिसके हल होने पर कंपनी की पब्लिक एक्सचेंज पर लिस्टिंग स्टेटस बदल सकता है।
निवेशकों को अहमदाबाद स्टॉक एक्सचेंज की डी-लिस्टिंग अर्जी की स्थिति पर नजर रखनी चाहिए, जिसे 1999 से ही लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। इसके अलावा, MCA और स्टॉक एक्सचेंज के बीच शेयर पूंजी के आंकड़ों में लगभग 27,300 शेयरों के अंतर पर भी ध्यान देना होगा, जो आंशिक रूप से भुगतान किए गए शेयरों से जुड़ा है। कंपनी की स्थिति के संबंध में किसी भी अतिरिक्त कंप्लायंस अपडेट या नियामक संचार पर नजर रखी जानी चाहिए।
