कंपनी की खराब माली हालत
Tirupati Fincorp Ltd ने 31 मार्च, 2026 को समाप्त हुई तिमाही और पूरे फाइनेंशियल ईयर के नतीजे जारी किए हैं, जो कंपनी की गंभीर माली हालत को दर्शाते हैं। Q4 FY26 के लिए कंपनी को ₹4.37 करोड़ का स्टैंडअलोन नेट लॉस हुआ। इस तिमाही में कंपनी का कुल रेवेन्यू (Total Revenue) ₹4.11 करोड़ रहा, जो पिछले साल की समान अवधि से 27.39% कम है। वहीं, पूरे फाइनेंशियल ईयर 2026 में कंपनी को ₹5.76 करोड़ का घाटा हुआ, जबकि इसका सालाना रेवेन्यू पिछले फाइनेंशियल ईयर के ₹110.70 करोड़ से 77.30% गिरकर सिर्फ ₹25.13 करोड़ रह गया।
ऑडिटर की चेतावनी और नेट वर्थ में भारी गिरावट
कंपनी के फाइनेंशियल स्टेटमेंट्स पर ऑडिटर (Auditor) की डिस्क्लेमर ऑफ ओपिनियन (Disclaimer of Opinion) ने चिंताएं और बढ़ा दी हैं। इसका मतलब है कि ऑडिटर खातों की सटीकता को सत्यापित नहीं कर पाए, जो वित्तीय रिकॉर्ड रखने में संभावित समस्याओं का संकेत देता है। इन चिंताओं को और गहराते हुए, कंपनी की नेट वर्थ में 95% से अधिक की भारी गिरावट आई है। 31 मार्च, 2026 तक कंपनी की कुल इक्विटी (Total Equity) ₹585.83 लाख से घटकर मात्र ₹12.50 लाख रह गई।
RBI के साथ नियामक परेशानियाँ
माली हालत की खस्ताहाली के बीच, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के साथ कंपनी की नियामक परेशानियाँ भी बढ़ गई हैं। RBI ने 2019 में Tirupati Fincorp का नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी (NBFC) के तौर पर रजिस्ट्रेशन रद्द कर दिया था। इसके बावजूद, कंपनी फाइनेंसिंग गतिविधियाँ जारी रखे हुए थी। लेकिन, मई 2025 में नए अप्रूवल के लिए कंपनी का आवेदन RBI ने खारिज कर दिया और तुरंत प्रभाव से कामकाज बंद करने का निर्देश दिया।
भविष्य पर अनिश्चितता के बादल
इन सब समस्याओं - भारी वित्तीय नुकसान, गिरता रेवेन्यू, ऑडिटर की चेतावनी और कामकाज बंद करने के नियामक आदेश - ने Tirupati Fincorp के भविष्य पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कंपनी की गोइंग कंसर्न (Going Concern) के तौर पर बने रहने की क्षमता पर गंभीर संदेह है। नेट वर्थ के लगभग पूरी तरह खत्म हो जाने से शेयरधारकों का मूल्य भी बुरी तरह प्रभावित हुआ है। मैनेजमेंट पर वित्तीय रिपोर्टिंग और पिछली नियामक अनियमितताओं को लेकर गहन जांच का सामना करना पड़ रहा है।