Haryana Financial Corporation (HFC) ने बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) को सूचित किया है कि 2012 बैच के IAS अधिकारी Sushil Sarwan ने 19 मार्च, 2026 से कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर (MD) का पदभार संभाल लिया है। उन्होंने डॉ. आदित्य दहिया, IAS की जगह ली है।
इस नेतृत्व परिवर्तन का महत्व इसलिए बढ़ जाता है क्योंकि HFC राज्य सरकार के अधीन एक महत्वपूर्ण संस्था है जिसका उद्देश्य छोटे और मध्यम उद्यमों (SMEs) को बढ़ावा देना है। हालांकि, कंपनी 2010 से नए लोन जारी नहीं कर रही है और उसकी फाइनेंशियल वायबिलिटी पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। ऐसे में, नए MD की रणनीतिक योजना कंपनी के भविष्य के लिए निर्णायक साबित हो सकती है।
1967 में हरियाणा सरकार और IDBI द्वारा स्थापित HFC, उद्योगों को वित्तीय सहायता देती रही है। यह 1995 में BSE पर लिस्ट होने वाली पहली राज्य-स्तरीय वित्तीय संस्था बनी थी। Sushil Sarwan को HFC के अलावा HSIIDC में काम करने का अनुभव भी है, और वह कुरुक्षेत्र के डेप्युटी कमिश्नर भी रह चुके हैं।
HFC के सामने कई बड़ी चुनौतियां हैं। कंपनी के ऑडिटर ने अपनी नवीनतम रिपोर्ट ( 31 मार्च, 2025 को समाप्त हुए फाइनेंशियल ईयर) में इसके 'गोइंग कंसर्न' (Going Concern) के तौर पर जारी रहने की क्षमता पर चिंता जताई है। पिछली चर्चाओं में HFC को बंद करने या लिक्विडेट (Liquidate) करने के विकल्प भी तलाशे गए हैं। मई 2010 से नए लोन पर रोक के कारण इसकी परिचालन क्षमता सीमित हो गई है। साथ ही, अन्य स्टेट फाइनेंशियल कॉर्पोरेशन्स की तरह HFC भी बैंकों और NBFCs से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना कर रही है, जिनके पास फंड जुटाने के बेहतर विकल्प मौजूद हैं।
