SEBI के निर्धारित ढांचे के तहत, Shikhar Leasing & Trading Ltd. ने 31 मार्च, 2026 को 'लार्ज कॉर्पोरेट' (LC) के दायरे में न आने की आधिकारिक पुष्टि की है। कंपनी ने 28 अप्रैल, 2026 को बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) को सूचित किया कि वह भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) द्वारा तय किए गए इस दर्जे के मापदंडों को पूरा नहीं करती है। यह स्थिति SEBI के 10 अगस्त, 2021 के सर्कुलर के अनुरूप है।
यह घोषणा Shikhar Leasing की कंप्लायंस (Compliance) और पूंजी जुटाने (Capital-raising) की प्रक्रियाओं को काफी सरल बनाती है। 'लार्ज कॉर्पोरेट' न मानी जाने वाली कंपनियों को SEBI की कुछ कड़े नियमों से छूट मिलती है, जिसमें डेट सिक्योरिटीज (Debt Securities) के माध्यम से अनिवार्य फंड जुटाना और बड़ी संस्थाओं पर लागू होने वाले विस्तृत डिस्क्लोजर नॉर्म्स (Disclosure Norms) शामिल हैं। इससे Shikhar Leasing को पूंजी प्राप्त करने की अपनी रणनीतियों में अधिक लचीलापन मिलेगा।
SEBI ने कॉर्पोरेट बॉन्ड मार्केट को बढ़ावा देने के लिए लार्ज कॉर्पोरेट फ्रेमवर्क की शुरुआत की थी। आम तौर पर, एक लिस्टेड कंपनी को लार्ज कॉर्पोरेट तब माना जाता है जब उसके पास ₹1,000 करोड़ या उससे अधिक के बकाया लॉन्ग-टर्म बॉरोइंग्स (Long-term Borrowings) हों और उसका क्रेडिट रेटिंग 'AA' या उससे ऊपर का हो। ऐसी संस्थाओं को अपने नए बॉरोइंग्स का एक न्यूनतम हिस्सा डेट सिक्योरिटीज के माध्यम से जुटाना अनिवार्य होता है।
नतीजतन, डेट इश्यूएंस (Debt Issuance) से संबंधित Shikhar Leasing का कंप्लायंस का बोझ कम हो गया है। कंपनी SEBI के अनिवार्य डेट सिक्योरिटी लक्ष्यों के बिना पूंजी जुटाने के तरीकों को चुनने की अपनी फ्लेक्सिबिलिटी (Flexibility) बनाए रखती है और उसे तुरंत लार्ज कॉर्पोरेट डेट मार्केट के लिए विशिष्ट डिस्क्लोजर नॉर्म्स का पालन करने की आवश्यकता नहीं है।
इस तरह की फाइलिंग असामान्य नहीं है। हाल ही में Alacrity Securities और Shetron Limited जैसी कई अन्य लिस्टेड कंपनियों ने भी 'लार्ज कॉर्पोरेट' न होने की अपनी स्थिति की पुष्टि की है, जो SEBI के LC वित्तीय थ्रेशोल्ड (Financial Thresholds) से नीचे की संस्थाओं के लिए एक मानक कंप्लायंस घोषणा दर्शाती है।
इस वर्गीकरण घोषणा से जुड़े कोई विशिष्ट जोखिम नहीं हैं, क्योंकि यह केवल SEBI द्वारा परिभाषित मानदंडों के सापेक्ष कंपनी की स्थिति की पुष्टि करती है।
