फंड जुटाने की रणनीति
ShaliBhadra Finance Limited का बोर्ड ₹19.50 करोड़ के नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर्स (NCDs) प्राइवेट प्लेसमेंट के जरिए जारी करने के लिए तैयार है। इन डिबेंचर्स पर 12% का सालाना कूपन रेट (ब्याज) मिलेगा, जिसका भुगतान मासिक आधार पर होगा। कंपनी इन डिबेंचर्स को BSE पर लिस्ट कराने की योजना बना रही है ताकि इनकी लिक्विडिटी बढ़ाई जा सके।
इस कदम का मकसद कंपनी की कैपिटल बेस को मजबूत करना और अपने फाइनेंसिंग ऑपरेशंस, खासकर टू-व्हीलर और अन्य रिटेल फाइनेंसिंग के लिए फंड जुटाना है। ये डिबेंचर्स कंपनी के लोन रिसीवेबल्स और बुक डेट्स पर फर्स्ट-रैंकिंग चार्ज के जरिए सिक्योर्ड होंगे, और इन्हें प्रमोटर की पर्सनल गारंटी का भी सपोर्ट मिलेगा।
कंपनी का बैकग्राउंड और हालिया परफॉरमेंस
1992 में स्थापित और 1995 से BSE पर लिस्टेड, ShaliBhadra Finance एक नॉन-बैंकिंग फाइनेंसियल कंपनी (NBFC) के तौर पर काम करती है। यह मुख्य रूप से गुजरात, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश में रूरल और सेमी-अर्बन ग्राहकों को सेवा देती है। कंपनी टू-व्हीलर, ऑटो-रिक्शा और कंज्यूमर ड्यूरेबल की फाइनेंसिंग पर फोकस करती है।
फाइनेंशियल ईयर 25 (FY25) में, ShaliBhadra ने लगभग ₹46 करोड़ का नया शेयर (equity) जुटाया था। FY25 के अंत तक इसका लोन बुक 31% बढ़कर ₹180 करोड़ हो गया था। कंपनी की कैपिटल एडिक्वेसी रेश्यो (CAR) मजबूत है और ICRA ने इसे BBB- (स्टेबल) रेटिंग दी है।
FY2026 की तीसरी तिमाही में, कंपनी का रेवेन्यू 13.3% बढ़कर ₹11.16 करोड़ रहा, जबकि नेट प्रॉफिट 6.79% बढ़कर ₹5.03 करोड़ दर्ज किया गया। 31 मार्च 2025 तक, कंपनी का लोन बुक ₹180 करोड़ था।
आगे की राह और जोखिम
इस NCD इश्यू से कंपनी का कुल कर्ज ₹19.50 करोड़ बढ़ेगा, जिससे उसके लेवरेज रेश्यो पर असर पड़ेगा। लेकिन, जुटाए गए फंड से नए लोन देने और बिजनेस ग्रोथ के लिए लिक्विडिटी बढ़ेगी। BSE लिस्टिंग निवेशकों को एक रेग्युलेटेड ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म देगी और यह इश्यू कंपनी के फंडिंग सोर्सेज को डाइवर्सिफाई करेगा।
हालांकि, कंपनी को इंटरेस्ट रेट्स में उतार-चढ़ाव, लोन के बोझ को मैनेज करने और क्रेडिट रिस्क जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। NBFC सेक्टर में ShaliBhadra Finance का मुकाबला Muthoot Finance, Shriram Finance और Bajaj Finance जैसे बड़े प्लेयर्स से है।
