पूरे साल का प्रदर्शन भी दमदार
यह सिर्फ एक तिमाही का कमाल नहीं है, बल्कि पूरे फाइनेंशियल ईयर 2026 (FY26) के नतीजों में भी कंपनी का नेट प्रॉफिट 78% से ज्यादा बढ़कर ₹332 करोड़ रहा। वहीं, सालाना रेवेन्यू में 22.5% से ज्यादा की बढ़ोतरी देखी गई और यह ₹3,160 करोड़ के पार चला गया।
कर्ज़ का 'भूत' निवेशकों को क्यों सता रहा है?
नतीजे शानदार होने के बावजूद, निवेशकों की चिंताएं बढ़ी हुई हैं। इसकी मुख्य वजह कंपनी का बढ़ता हुआ कर्ज (Borrowings) है। FY26 में कंपनी का कंसॉलिडेटेड बोरिंग ₹9,022 करोड़ के पार पहुंच गया, जो पिछले साल ₹6,622 करोड़ था।
इस आक्रामक विस्तार (Expansion) की वजह से कंपनी पर कर्ज का बोझ काफी बढ़ गया है। स्टैंडअलोन डेट-टू-इक्विटी रेशियो (Debt-to-Equity Ratio) 3.07 है, जबकि कंसॉलिडेटेड रेशियो 3.86 पर है। यानी, हर 1 रुपये की इक्विटी पर कंपनी पर 3.86 रुपये का कर्ज है। बढ़ते कर्ज के कारण इंटरेस्ट कॉस्ट (Interest Cost) भी ₹965 करोड़ से बढ़कर ₹928 करोड़ (पिछले साल के मुकाबले) हो गया है।
माइक्रोफाइनेंस सेक्टर में बड़ी प्लेयर
Satin Creditcare एक नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी (NBFC) है जो माइक्रोफाइनेंस का काम करती है। इसका लक्ष्य ज्यादा से ज्यादा लोगों को लोन देना और अपना कारोबार बढ़ाना है। इसके लिए कंपनी काफी सारा पैसा उधार ले रही है।
आगे क्या?
यह स्थिति निवेशकों के लिए मिली-जुली है। एक तरफ जहां कंपनी तेजी से बढ़ रही है, वहीं दूसरी तरफ कर्ज का बढ़ता स्तर जोखिम भी पैदा करता है। अगर कंपनी का लोन पोर्टफोलियो (Loan Portfolio) अच्छा प्रदर्शन करता रहा तो रिटर्न भी ज्यादा मिलेगा, लेकिन अगर लोन की क्वालिटी बिगड़ी या ब्याज दरें बढ़ीं तो कंपनी की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
माइक्रोफाइनेंस सेक्टर में Spandana Sphoorty Financial और Bandhan Bank जैसी कंपनियां भी बड़ा कर्ज़ लेकर कारोबार कर रही हैं। Investors अब Satin Creditcare के मैनेजमेंट की कर्ज कम करने की योजनाओं और भविष्य की कैपिटल रेजिंग (Capital Raising) प्लान्स पर बारीकी से नजर रखेंगे।
