संजीव गोयल ने Intec Capital Limited के 22,53,078 इक्विटी शेयर ₹2.48 करोड़ में खरीदे हैं। उन्होंने ₹11 प्रति शेयर का भाव चुकाया है। यह खरीदारी India Business Excellence Fund-IIA नाम के PE फंड से की गई है। इस सौदे को 'इंटर-से प्रमोटर ट्रांसफर' के तौर पर देखा जा रहा है।
इस डील के बाद, संजीव गोयल के पास अब Intec Capital की कुल शेयर कैपिटल का 19.04% हिस्सा है, जो कुल 34,97,542 शेयर के बराबर है। वहीं, बेचने वाले India Business Excellence Fund-IIA के पास अब 9,04,922 शेयर बचे हैं, जो कुल इक्विटी का 4.92% है।
इस सौदे से Sanjeev Goel को Intec Capital के अंदर अपनी पकड़ और कंट्रोल और मज़बूत करने का मौका मिला है। 'इंटर-से प्रमोटर ट्रांसफर' स्ट्रक्चर का फायदा यह है कि यह भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) के ओपन ऑफर नियमों से बाहर है। इसका मतलब है कि कंपनी को पब्लिक बोली लगाने की ज़रूरत नहीं पड़ी, जिससे मौजूदा शेयरधारकों की हिस्सेदारी कम होने से बच गई।
Intec Capital Limited एक नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी (NBFC) है जो कमर्शियल व्हीकल (Commercial Vehicle) और कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट (Construction Equipment) के लिए लोन देने का काम करती है। India Business Excellence Fund-IIA एक प्राइवेट इक्विटी फंड है जो भारतीय कंपनियों में निवेश करता है।
इस तरह से स्वामित्व का कंसॉलिडेशन (Consolidation) मौजूदा प्रमोटर्स के बीच ओनरशिप (Ownership) को और केंद्रित करता है। यह कंपनी के भविष्य के फैसलों पर प्रमोटर के प्रभाव को बढ़ाने या स्ट्रेटेजिक (Strategic) बदलाव का संकेत दे सकता है।
Intec Capital NBFC सेक्टर के कड़े मुकाबले में काम करती है। Cholamandalam Investment and Finance Company Ltd और Shriram Finance Ltd जैसी बड़ी कंपनियां इससे काफी बड़ी हैं। इन बड़ी कंपनियों के पास आमतौर पर कैपिटल (Capital) की ज्यादा पहुंच होती है और वे ज़्यादा फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स (Financial Products) ऑफर करती हैं, जिससे Intec Capital जैसी छोटी NBFCs के लिए यह एक चुनौतीपूर्ण माहौल पैदा करता है।
अब निवेशक Intec Capital पर नज़र रखेंगे कि प्रमोटर्स की यह बढ़ी हुई हिस्सेदारी भविष्य में क्या नए स्ट्रेटेजिक कदम या ऑपरेशनल बदलाव लाती है। कंपनी की भविष्य की कैपिटल जुटाने की योजनाएं या एसेट-लायबिलिटी मैनेजमेंट (Asset-Liability Management) रणनीतियों में कोई एडजस्टमेंट (Adjustment) अहम संकेत होंगे। प्रमोटर्स या बड़े इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (Institutional Investors) द्वारा हिस्सेदारी में किसी और बड़े बदलाव पर भी नजर रखी जाएगी।
