SBI ने फंड जुटाने में मारी बाजी
देश के सबसे बड़े बैंक, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) ने 20 मार्च 2026 को घोषणा की कि उन्होंने ₹6,051 करोड़ का फंड जुटा लिया है। यह पैसा Basel III के तहत जारी किए गए टियर-2 बॉन्ड के जरिए आया है। इन बॉन्ड पर 7.05% सालाना ब्याज मिलेगा, जिसका भुगतान सालाना किया जाएगा, और इनकी मैच्योरिटी 10 साल की है।
निवेशकों ने दिखाया भरोसा
यह बॉन्ड इश्यू 17 मार्च 2026 को खुला और उसी दिन बंद हो गया। इस दौरान, ₹5,000 करोड़ के बेस इश्यू साइज से करीब दोगुना, यानी लगभग ₹10,000 करोड़ से अधिक की बोलियां आईं। 47 क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बिडर्स (जैसे प्रोविडेंट फंड, पेंशन फंड, म्यूचुअल फंड और बैंक) ने इसमें पैसा लगाया, जो SBI में निवेशकों के मजबूत विश्वास को दर्शाता है।
फंड का क्या होगा?
यह कैपिटल इनफ्यूजन (पूंजी प्रवाह) SBI के टियर-2 कैपिटल को मजबूत करेगा। इससे बैंक को Basel III के रेगुलेटरी स्टैंडर्ड्स को पूरा करने में मदद मिलेगी और उसकी वित्तीय सेहत और मजबूत होगी। इस बढ़ी हुई पूंजी के साथ, SBI भविष्य में क्रेडिट ग्रोथ (कर्ज देने की क्षमता) को सपोर्ट कर पाएगा, जो देश की आर्थिक तरक्की के लिए बेहद जरूरी है।
बैंकों के लिए यह क्यों है अहम?
भारतीय बैंक अक्सर अपने कैपिटल बफर्स (पूंजी की सुरक्षा) को मजबूत करने के लिए डेट मार्केट (कर्ज बाजार) का सहारा लेते हैं। टियर-2 बॉन्ड एक अहम इंस्ट्रूमेंट हैं जो शेयरधारकों की हिस्सेदारी कम किए बिना लंबे समय के लिए फंड जुटाने का जरिया बनते हैं। SBI ने इससे पहले भी ₹7,500 करोड़ का टियर-2 बॉन्ड 6.93% कूपन पर जारी किया था।
SBI के फाइनेंशियल लक्ष्य
SBI का लक्ष्य मार्च 2026 तक अपने Capital Adequacy Ratio (CAR) को 15% या उससे ऊपर बनाए रखना है। वहीं, Common Equity Tier 1 (CET1) रेशियो 12% पर रखने की योजना है। यह फंड जुटाना इसी लक्ष्य को पाने में मददगार होगा।
आगे क्या?
इस ₹6,051 करोड़ के फंड से SBI के CAR में बढ़ोतरी होगी, जिससे रेगुलेटरी न्यूनतम स्तरों से उसका बफर बढ़ेगा। यह बैंक की कर्ज देने की क्षमता को बढ़ाएगा और बड़े क्रेडिट फैसलों को सपोर्ट करेगा। साथ ही, यह अनपेक्षित जोखिमों और बाजार की अस्थिरता को झेलने की क्षमता भी बढ़ाएगा।
बरोइंग कॉस्ट और पीयर कंपेरिजन
7.05% का कूपन रेट मौजूदा मार्केट इंटरेस्ट रेट्स को दर्शाता है। भविष्य में फंड जुटाने की लागत बाजार की बदलती ब्याज दरों पर निर्भर करेगी। SBI के अन्य बड़े बैंक साथियों की बात करें तो 31 मार्च 2025 तक HDFC Bank का CAR 19.6%, ICICI Bank का 16.6% और Bank of Baroda का 17.2% था। वहीं, SBI का CAR सितंबर 2025 तक 14.62% था, और मार्च 2026 तक इसे 15% तक पहुंचाने का लक्ष्य है।
