SEBI के नियमों के तहत 'लार्ज कॉर्पोरेट' का दर्जा खोने के बाद Royale Manor Hotels & Industries Ltd को फंड जुटाने में नई चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। कंपनी ने 29 अप्रैल, 2026 को यह स्पष्ट किया है कि वह भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) द्वारा निर्धारित 'लार्ज कॉर्पोरेट' के मापदंडों को पूरा नहीं करती है। यह घोषणा SEBI द्वारा 19 अक्टूबर, 2023 को जारी किए गए अपडेट के संदर्भ में आई है, जिसमें 'लार्ज कॉर्पोरेट' की परिभाषा को संशोधित किया गया था।
'लार्ज कॉर्पोरेट' का स्टेटस उन कंपनियों के लिए महत्वपूर्ण होता है जो कैपिटल मार्केट से कर्ज (debt) जुटाना चाहती हैं। इस दर्जे वाली कंपनियों को आमतौर पर फंड रेजिंग के लिए अधिक सुगम रास्ते और सरल प्रक्रियाएं मिलती हैं। अब Royale Manor Hotels & Industries Ltd के पास यह स्टेटस न होने के कारण, पब्लिक डेट इश्यूअंस जैसे माध्यमों से फंड जुटाने के विकल्पों में कमी आ सकती है।
SEBI ने समय-समय पर 'लार्ज कॉर्पोरेट' की परिभाषा में बदलाव किए हैं, जिसमें 26 नवंबर, 2018, 10 अगस्त, 2021 और 19 अक्टूबर, 2023 की महत्वपूर्ण सर्कुलर शामिल हैं। ये परिभाषाएं आमतौर पर कंपनी के मार्केट वैल्यू, कर्ज के आकार या क्रेडिट रेटिंग जैसे पैमानों पर आधारित होती हैं। Royale Manor Hotels & Industries Ltd के इस बयान से पुष्टि होती है कि कंपनी इन पैमानों पर SEBI की वर्तमान सीमा से नीचे है।
इस घोषणा के बाद, कंपनी को भविष्य में अपनी पूंजी जुटाने की योजनाओं के लिए नॉन-लार्ज कॉर्पोरेट संस्थाओं के नियमों का पालन करना होगा। इससे ग्रोथ या ऑपरेशंस के लिए पूंजी सुरक्षित करने में देरी या लागत बढ़ने का जोखिम हो सकता है। कंपनी को फंड जुटाने के वैकल्पिक, और संभवतः कम प्रभावी, तरीकों पर विचार करना पड़ सकता है।
हालांकि प्रत्यक्ष तुलना उपलब्ध नहीं है, लेकिन हॉस्पिटैलिटी सेक्टर की बड़ी कंपनियां जैसे कि Indian Hotels Company Ltd और EIH Ltd (Oberoi Hotels) आमतौर पर ऐसे पैमाने पर काम करती हैं कि उन्हें 'लार्ज कॉर्पोरेट' का स्टेटस मिलता है, जिससे उन्हें फंड जुटाने में अधिक सहूलियत होती है।
