Regency Fincorp के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने हाल ही में हुई एक अहम बैठक में कई बड़े फैसले लिए हैं। कंपनी ने अपनी पूंजी बढ़ाने और कर्ज देने की क्षमता का विस्तार करने के इरादे से वित्त वर्ष 2026-27 के लिए ₹500 करोड़ तक के नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर (NCD) जारी करने की योजना को हरी झंडी दे दी है।
बोर्ड ने श्री संजय मित्तल को गैर-कार्यकारी स्वतंत्र अतिरिक्त निदेशक (Non-Executive Independent Additional Director) के तौर पर नियुक्त करने को भी मंजूरी दी। वहीं, बोर्ड ने सुश्री सलोनी श्रीवास्तव के गैर-कार्यकारी स्वतंत्र निदेशक पद से इस्तीफे को स्वीकार कर लिया। इसके अलावा, कंपनी के आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन (Articles of Association - AoA) में संशोधन को भी मंजूरी दी गई।
इस ₹500 करोड़ के NCD इश्यू का मुख्य उद्देश्य Regency Fincorp की बैलेंस शीट को मजबूत करना और इसे अपनी विस्तार योजनाओं के लिए फंड जुटाने में मदद करना है। यह कदम नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी (NBFC) के लिए वित्तीय लचीलापन बढ़ाएगा।
शेयरधारकों की मंजूरी लेने के लिए, 22 अप्रैल, 2026 को एक एक्स्ट्रा-ऑर्डिनरी जनरल मीटिंग (EGM) बुलाई गई है। इस मीटिंग में NCD जारी करने और आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन में प्रस्तावित संशोधनों पर वोटिंग होगी।
Regency Fincorp, जो कि एक रजिस्टर्ड NBFC है, एमएसएमई (MSME) को पर्सनल लोन और माइक्रो-लोन देती है। कंपनी का पूंजी जुटाने का इतिहास रहा है, जिसमें हाल ही में ₹25 करोड़ के सिक्योर NCDs 14% ब्याज दर पर जारी करना और वॉरंट कन्वर्जन से इक्विटी जुटाना शामिल है। यह रणनीति मजबूत कैपिटल स्ट्रक्चर बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है, जैसा कि Bajaj Finance, Cholamandalam Investment और Shriram Finance जैसी बड़ी NBFCs भी करती हैं।
निवेशकों की नजरें अब 22 अप्रैल को होने वाली EGM पर टिकी हैं, जहां NCD इश्यू और AoA संशोधनों पर फैसला होगा। इसके अलावा, नए NCDs की शर्तें, कंपनी की भविष्य की पूंजी जुटाने की रणनीति और श्री संजय मित्तल के बोर्ड में आने से कंपनी को क्या फायदा होगा, यह देखना अहम होगा।
