बोर्ड के अहम फैसले: पूंजी जुटाना और डूबा कर्ज राइट-ऑफ
Real Touch Finance Limited के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने 20 मार्च 2026 को हुई बैठक में दो बड़े वित्तीय फैसलों को हरी झंडी दे दी है। कंपनी प्राइवेट प्लेसमेंट के जरिए सिक्योरड, रिडीमेबल नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर्स (NCDs) इश्यू करके ₹2.56 करोड़ की पूंजी जुटाएगी। वहीं, कंपनी प्रबंधन ने ₹3.48 करोड़ की ऐसी देनदारियों (Receivables) को भी राइट-ऑफ करने को मंजूरी दी है, जिन्हें अब वसूलना संभव नहीं माना जा रहा है।
NCDs से मिलेगी लेंडिंग को रफ्तार
जुटाए गए ₹2.56 करोड़ की रकम का इस्तेमाल कंपनी अपनी लेंडिंग (उधार देने) की गतिविधियों को बढ़ाने और ग्रोथ को सपोर्ट करने के लिए करेगी। इन NCDs पर 9.50% का फिक्स्ड एनुअल कूपन रेट मिलेगा और ये अलॉटमेंट डेट से 3 साल में मैच्योर होंगी। यह कदम नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी (NBFC) के लिए डेट कैपिटल जुटाने की एक स्ट्रैटेजिक पहल है।
एसेट क्वालिटी पर असर?
हालांकि, ₹3.48 करोड़ के बैड डेट्स को राइट-ऑफ करना थोड़ा चिंताजनक हो सकता है। यह राइट-ऑफ कंपनी के कुल टर्नओवर (जो ₹28.89 करोड़ था) का लगभग 12.05% है। भले ही मैनेजमेंट इसे एक बार का एडजस्टमेंट बता रहा है, यह कंपनी की एसेट क्वालिटी या कलेक्शन एफिशिएंसी पर कुछ सवाल खड़े कर सकता है।
कंपनी का प्रोफाइल और पिछली परफॉरमेंस
Real Touch Finance दो दशकों से अधिक अनुभव वाली एक रजिस्टर्ड NBFC है, जो मुख्य रूप से तमिलनाडु में पर्सनल लोन, लोन अगेंस्ट प्रॉपर्टी और बिजनेस लोन ऑफर करती है। पिछले साल जुलाई 2025 में, Infomerics Ratings ने कंपनी की लॉन्ग-टर्म बोरिंग्स को 'IVR BBB/Stable' रेटिंग दी थी, जो अच्छी कैपिटलाइजेशन और अनुभवी प्रमोटर्स का संकेत था। मार्च 2025 तक, कंपनी का कैपिटल एडिक्वेसी रेशियो (CRAR) 25.81% था, जो रेगुलेटरी नॉर्म्स से काफी ऊपर था। वहीं, ग्रॉस नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (NPA) 1.06% और नेट NPA 0.74% थे।
इसके विपरीत, जनवरी 2026 में MarketsMojo की एक रिपोर्ट में कंपनी को 'Strong Sell' रेटिंग दी गई थी, जिसमें क्वालिटी मेट्रिक्स में गिरावट, तिमाही मुनाफे में भारी कमी और कम इंटरेस्ट कवरेज रेशियो जैसी चिंताओं का जिक्र था। कंपनी ने फाइनेंशियल ईयर 2025 में अकेले ₹5,477.06 करोड़ की लॉन्ग-टर्म बोरिंग्स उठाई थीं।
आगे क्या देखना होगा?
- ₹2.56 करोड़ के NCD प्राइवेट प्लेसमेंट का सफल होना और उसकी शर्तें।
- कंपनी प्रबंधन का एसेट क्वालिटी, राइट-ऑफ के कारणों और रिकवरी की भविष्य की रणनीतियों पर कमेंट्री।
- ₹3.48 करोड़ के राइट-ऑफ का कंपनी के मौजूदा प्रॉफिट-लॉस स्टेटमेंट पर तत्काल प्रभाव।
- आने वाली फाइनेंशियल रिपोर्ट्स में एसेट क्वालिटी मेट्रिक्स में सुधार या गिरावट पर नजर रखना।
- NCDs से जुटाई गई नई पूंजी का इस्तेमाल कैसे होगा और उससे क्या रिटर्न मिलेगा।
