पोर्टफोलियो ट्रांसफर के पीछे की रणनीति
कंपनी का यह कदम अपनी वित्तीय स्थिति को मजबूत करने के लिए एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है। इस ट्रांसफर के तहत दो अलग-अलग हिस्सों में लोन पोर्टफोलियो को बांटा गया है।
पहला हिस्सा, जिसमें ₹12.74 करोड़ की राशि शामिल है, 20 अप्रैल, 2026 से प्रभावी होगा। वहीं, दूसरा और छोटा हिस्सा, जिसकी राशि ₹0.29 करोड़ है, 1 जून, 2026 से लागू होगा।
Real Touch Finance का मानना है कि इस पोर्टफोलियो री-असाइनमेंट से कंपनी की लिक्विडिटी पोजीशन में सुधार होगा और कैपिटल को और प्रभावी ढंग से आवंटित करने में मदद मिलेगी। एक नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी (NBFC) के तौर पर, यह कदम कंपनी को अपनी फंड की जरूरतों को पूरा करने और ग्रोथ के नए अवसरों में निवेश करने के लिए अधिक लचीलापन देगा।
कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया है कि इस पोर्टफोलियो ट्रांसफर से कंपनी पर कोई बड़ा नकारात्मक वित्तीय प्रभाव (Adverse Financial Impact) पड़ने की उम्मीद नहीं है।
इंडस्ट्री में क्या हो रहा है?
NBFC सेक्टर में इस तरह के पोर्टफोलियो मैनेजमेंट आम बात है। चोलामंडलम इन्वेस्टमेंट एंड फाइनेंस (Cholamandalam Investment and Finance) और पीएनबी हाउसिंग फाइनेंस (PNB Housing Finance) जैसी कंपनियां भी अपने बैलेंस शीट को ऑप्टिमाइज़ (Optimize) करने और कैपिटल स्ट्रक्चर (Capital Structure) को बेहतर बनाने के लिए समय-समय पर अपने लोन पोर्टफोलियो का प्रबंधन करती हैं या उनमें बदलाव करती हैं।
