REC के बोर्ड में अब PFC की पैनी नज़र!
REC Limited के बोर्ड में एक महत्वपूर्ण नियुक्ति हुई है। कंपनी ने राजेश कुमार अग्रवाल, जो Power Finance Corporation (PFC) में डायरेक्टर (फाइनेंस) के पद पर हैं, को अपने बोर्ड में नॉमिनी डायरेक्टर बनाया है। यह बदलाव 1 मई, 2026 से लागू होगा। इस नियुक्ति को मिनिस्ट्री ऑफ पावर (Ministry of Power) ने अपनी हरी झंडी दे दी है।
क्यों की गई ये नियुक्ति?
इस कदम का मुख्य उद्देश्य REC और उसकी पेरेंट कंपनी PFC के बीच चल रहे रणनीतिक संबंधों को और गहरा करना है। PFC, जो पावर सेक्टर की फाइनेंसिंग में एक बड़ा नाम है, के डायरेक्टर (फाइनेंस) के तौर पर राजेश कुमार अग्रवाल अपने अनुभव और वित्तीय विशेषज्ञता को REC के बोर्ड में लाएंगे। इससे PFC की ओर से REC के संचालन पर लगातार नज़र रखी जा सकेगी और रणनीतिक तालमेल बना रहेगा। यह REC की गवर्नेंस को मज़बूत करेगा और एक महत्वपूर्ण हितधारक की भागीदारी सुनिश्चित करेगा।
PFC की REC में कितनी हिस्सेदारी?
यह जानना भी ज़रूरी है कि PFC, जो खुद एक सरकारी कंपनी है और पावर सेक्टर को फाइनेंस करती है, ने मार्च 2019 में भारत सरकार से REC Ltd में 52.63% हिस्सेदारी खरीदी थी। इस डील के बाद REC, PFC की सब्सिडियरी (subsidiary) बन गई थी, जिससे पावर फाइनेंसिंग सेक्टर में दोनों का दबदबा और बढ़ गया।
आगे क्या उम्मीदें?
राजेश कुमार अग्रवाल के बोर्ड में शामिल होने से REC की आगे की रणनीतिक दिशा PFC के बड़े लक्ष्यों के साथ और बेहतर ढंग से जुड़ पाएगी। शेयरधारक REC के कामकाज पर बढ़ी हुई वित्तीय और रणनीतिक निगरानी की उम्मीद कर सकते हैं। यह नियुक्ति REC की स्थिति को एक सरकारी-समर्थित वित्तीय संस्थान के तौर पर और पुख्ता करती है, जिसमें राज्य की सक्रिय भागीदारी है।
कंपनी की तरफ से दी गई जानकारी के अनुसार, मिनिस्ट्री ऑफ पावर का आदेश 6 मई, 2026 को आया, जबकि बोर्ड फाइलिंग 7 मई, 2026 को की गई।
