REC Limited ने घोषणा की है कि उसके बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स 25 मार्च 2026 को एक महत्वपूर्ण बैठक में भाग लेंगे। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य फाइनेंशियल ईयर 2026-27 के लिए कंपनी के मार्केट बौरोइंग प्रोग्राम को अंतिम मंजूरी देना है। पिछले फाइनेंशियल ईयर 2025-26 के लिए, बोर्ड ने ₹1.70 लाख करोड़ के बौरोइंग प्रोग्राम को मंजूरी दी थी।
यह निर्णय REC के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है, जो भारत की एक प्रमुख महा-रत्न एनबीएफसी (NBFC) है। यह योजना कंपनी की डेट फाइनेंसिंग स्ट्रैटेजी (debt financing strategy) को तय करती है और पावर तथा इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में अपनी व्यापक फंडिंग आवश्यकताओं को पूरा करने में मदद करती है।
ऊर्जा मंत्रालय के तहत एक सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम (PSU) के रूप में, REC भारत के ऊर्जा वित्त में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। कंपनी बिजली उत्पादन, पारेषण, वितरण और नवीकरणीय ऊर्जा से संबंधित परियोजनाओं को फंड करती है। इसके अलावा, REC ने इंफ्रास्ट्रक्चर और लॉजिस्टिक्स लेंडिंग में भी विस्तार किया है।
कंपनी की वित्तीय मजबूती का अंदाजा इसके मजबूत क्रेडिट रेटिंग्स से लगाया जा सकता है। India Ratings ने इसे 'IND AAA' (Stable) और CRISIL ने 'AAA' (Stable) रेटिंग दी है। REC का सबसे करीबी सह-प्रतिस्पर्धी (peer) पावर फाइनेंस कॉर्पोरेशन (PFC) है, जो इसकी मूल कंपनी भी है।
सितंबर 2025 तक, REC की लोन बुक लगभग ₹5.82 लाख करोड़ थी।
हालांकि, कंपनी को कुछ जोखिमों का भी सामना करना पड़ सकता है, जैसे कि मार्केट की वर्तमान स्थिति और ब्याज दरों में उतार-चढ़ाव, जो कर्ज जुटाने की लागत को प्रभावित कर सकते हैं।
निवेशकों को 25 मार्च 2026 को होने वाली बोर्ड बैठक के परिणामों का इंतजार है। बैठक के बाद, FY27 के लिए स्वीकृत बौरोइंग प्रोग्राम का आकार और उसमें इस्तेमाल किए जाने वाले विभिन्न डेट इंस्ट्रूमेंट्स (debt instruments) के बारे में स्पष्टता मिलेगी।
