मर्जर को बोर्ड की मंजूरी, अब राष्ट्रपति देंगे अंतिम मुहर
REC Limited के बोर्ड डायरेक्टर्स ने Power Finance Corporation (PFC) के साथ प्रस्तावित मर्जर को हरी झंडी दिखा दी है। 16 मई, 2026 को हुई बोर्ड मीटिंग में इस योजना को मंजूरी मिली और अब इसे अंतिम निर्णय के लिए भारत के राष्ट्रपति के पास भेजा गया है। यह कदम सरकारी कंपनियों को एक साथ लाने (PSU Consolidation) की बड़ी रणनीति का हिस्सा है।
नया चीफ कंप्लायंस ऑफिसर भी नियुक्त
इसी के साथ, REC ने मोहम्मद अज़ज़ अली को अपना नया चीफ कंप्लायंस ऑफिसर (CCO) नियुक्त करने की भी घोषणा की है। उनका कार्यकाल 17 मई, 2026 से शुरू होकर 30 जून, 2028 तक रहेगा।
क्या होगा मर्जर के बाद?
अगर राष्ट्रपति की मंजूरी मिल जाती है, तो REC Limited को PFC में मिला दिया जाएगा। कंपनीज़ एक्ट (Companies Act) के प्रावधानों के तहत, REC की सभी संपत्तियां और देनदारियां PFC को ट्रांसफर कर दी जाएंगी और REC का अस्तित्व समाप्त हो जाएगा। इस एकीकरण का मुख्य उद्देश्य भारतीय पावर और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर की वित्तीय जरूरतों को पूरा करने के लिए एक मजबूत इकाई तैयार करना है।
कंसॉलिडेशन की बड़ी चाल
यह मर्जर सरकारी कंपनियों की कार्यक्षमता बढ़ाने और उन्हें वित्तीय रूप से मजबूत बनाने की व्यापक सरकारी पहल का एक अहम हिस्सा है। दोनों कंपनियों के एक होने से संसाधनों का बेहतर आवंटन और परिचालन संबंधी दोहराव कम होने की उम्मीद है। हाल के वर्षों में REC और PFC के बीच विलय की चर्चाएं लगातार चलती रही हैं, जो सरकारी उपक्रमों को सुव्यवस्थित करने पर सरकार के फोकस को दर्शाती हैं।
आगे की राह और निवेशक क्या देखें
इस विलय की राह में कुछ अहम पड़ाव बाकी हैं, जिनमें राष्ट्रपति की अंतिम मंजूरी और दोनों कंपनियों के शेयरधारकों के लिए उचित एक्सचेंज रेश्यो (share exchange ratio) तय करना शामिल है। REC के शेयरधारकों की होल्डिंग को PFC के शेयरों में बदला जा सकता है, लेकिन इसके लिए नियुक्त वैल्युअर्स (valuers) द्वारा तय की गई एक्सचेंज रेश्यो का ऐलान होना बाकी है। इसके अलावा, रेगुलेटरी मंजूरी और इंटीग्रेशन प्रक्रिया में भी कुछ देरी हो सकती है। निवेशक अब राष्ट्रपति की ओर से आने वाले फैसले और शेयर एक्सचेंज रेश्यो के औपचारिक ऐलान का इंतजार कर रहे हैं।