RBI का फैसला: Ujjivan SFB को नहीं मिलेगा सीधा लाइसेंस
RBI ने 13 अप्रैल, 2026 को Ujjivan SFB को सूचित किया कि बैंक की लोन बुक (loan book) को और ज़्यादा डायवर्सिफाई (diversify) करने की ज़रूरत है, जिसके बाद ही उसे यूनिवर्सल बैंक का लाइसेंस मिल सकता है। इसलिए, रेगुलेटर ने बैंक का आवेदन वापस भेज दिया है। Ujjivan SFB को तब तक इंतजार करना होगा जब तक कि वह अपने लेंडिंग (lending) एक्टिविटीज में पर्याप्त विविधता नहीं दिखा पाता। यह डेवलपमेंट RBI के 04 फरवरी, 2025 को भेजे गए एक पिछले लेटर के बाद आया है।
यूनिवर्सल बैंक बनने का सपना लंबा खिंचा
इस देरी के कारण Ujjivan SFB का एक फुल-सर्विस यूनिवर्सल बैंक (Universal Bank) के तौर पर ट्रांसफॉर्मेशन (transformation) रुक गया है। यूनिवर्सल बैंक स्टेटस मिलने से Ujjivan को ज़्यादा ऑपरेशनल फ्लेक्सिबिलिटी (operational flexibility) मिलती और कुछ रेगुलेटरी ज़रूरतें (regulatory requirements) भी कम हो सकती थीं।
डायवर्सिफिकेशन की क्या है ज़रूरत?
Ujjivan SFB ने 26 अप्रैल, 2024 को RBI के छोटे फाइनेंस बैंकों को यूनिवर्सल बैंक में बदलने के फ्रेमवर्क (framework) के तहत लाइसेंस के लिए अप्लाई किया था। RBI ने इस कन्वर्जन (conversion) के लिए कुछ योग्यताएं तय की थीं, जिनमें एक मजबूत ट्रैक रिकॉर्ड, नेट वर्थ (net worth), प्रॉफिटेबिलिटी (profitability) और सबसे अहम, एक डायवर्सिफाइड लोन पोर्टफोलियो (diversified loan portfolio) शामिल था।
Ujjivan SFB ने कई मापदंडों को पूरा किया है, लेकिन उसका बड़ा हिस्सा अनसिक्योर्ड लोन (unsecured loans) - जो मार्च 2024 तक करीब 70% था - को डायवर्सिफिकेशन में एक बड़ी बाधा माना जा रहा है। बैंक सिक्योर्ड लेंडिंग (secured lending) बढ़ाने की कोशिश कर रहा था। FY19 में जहाँ यह 16% था, वहीं Q1FY26 तक यह बढ़कर 46% हो गया था, जिसका लक्ष्य 65-70% था। हालांकि, RBI को इस बदलाव के और पुख्ता संकेत चाहिए।
इंडस्ट्री में कौन आगे?
यह ध्यान देने लायक है कि AU Small Finance Bank को यूनिवर्सल बैंक बनने के लिए इन-प्रिंसिपल अप्रूवल (in-principle approval) मिल चुका है, जो इस राह पर चलने वाला पहला SFB है। Jana Small Finance Bank जैसे अन्य SFBs ने भी लाइसेंस के लिए अप्लाई किया है।
आगे क्या होगा Ujjivan SFB के लिए?
Ujjivan SFB को अब अपने लोन बुक को पारंपरिक माइक्रोफाइनेंस (microfinance) के दायरे से बाहर निकालकर ज़्यादा डायवर्सिफाई करने के लिए और तेज़ी से प्रयास करने होंगे। शेयरहोल्डर्स (shareholders) को यूनिवर्सल बैंक स्टेटस के संभावित फायदों का इंतजार करना पड़ेगा। बैंक को फिर से अप्लाई करने से पहले डायवर्सिफिकेशन एफर्ट्स (diversification efforts) में लगातार और मज़बूत प्रगति दिखानी होगी।
मुख्य रिस्क (Key Risks)
- एग्जीक्यूशन रिस्क (Execution Risk): बैंक के सामने RBI की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए लोन डायवर्सिफिकेशन स्ट्रेटेजी (loan diversification strategy) को समय पर लागू करने की चुनौती है, जिससे आगे और देरी हो सकती है।
- रेगुलेटरी अनिश्चितता (Regulatory Uncertainty): RBI के 'पर्याप्त डायवर्सिफिकेशन' के मापदंडों की स्पष्टता अभी भी पूरी तरह से नहीं है, जो अनिश्चितता पैदा कर सकती है।
