Purple Finance FY26 Results: घाटा घटा, रेवेन्यू बढ़ा, निवेशकों को मिली राहत!

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AuthorNeha Patil|Published at:
Purple Finance FY26 Results: घाटा घटा, रेवेन्यू बढ़ा, निवेशकों को मिली राहत!
Overview

Purple Finance Ltd. ने FY26 के लिए अपने ऑडिटेड फाइनेंशियल रिजल्ट्स (Audited Financial Results) जारी कर दिए हैं। कंपनी ने पिछले साल के **₹15.55 करोड़** के मुकाबले नेट लॉस (Net Loss) को घटाकर **₹6.44 करोड़** कर लिया है, जबकि रेवेन्यू (Revenue) **₹47.65 करोड़** पर पहुंच गया है। कंपनी के ऑडिटर ने भी अपनी अनमॉडिफाइड ओपिनियन (Unmodified Opinion) दी है।

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Purple Finance FY26 के नतीजे: घाटे में कमी और रेवेन्यू में उछाल

Purple Finance Limited ने 31 मार्च, 2026 को समाप्त हुए फाइनेंशियल ईयर (FY26) के लिए अपने ऑडिटेड नतीजे पेश किए हैं। कंपनी ने टैक्स के बाद ₹644.10 लाख (लगभग ₹6.44 करोड़) का स्टैंडअलोन नेट लॉस दर्ज किया है। यह पिछले फाइनेंशियल ईयर के ₹1,554.82 लाख (₹15.55 करोड़) के घाटे से काफी कम है। इस घाटे में कमी की मुख्य वजह कंपनी के रेवेन्यू में हुई बढ़ोतरी रही, जो FY26 में बढ़कर ₹4,764.79 लाख (₹47.65 करोड़) हो गया।

कंपनी के ऑडिटर ने इन फाइनेंशियल स्टेटमेंट्स पर अपनी अनमॉडिफाइड ओपिनियन दी है, जो रिपोर्टिंग में कंपनी के भरोसे को दर्शाता है।

NBFC का बिजनेस औरpast कंप्लायंस

एक नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी (NBFC) के तौर पर, Purple Finance छोटे टिकट साइज के सिक्योर्ड लोन (Secured Loans) छोटे और मध्यम उद्योगों (MSMEs) को देती है, खासकर टियर II और टियर III शहरों में। हाल के छोटे-मोटे कंप्लायंस (Compliance) लैप्स के बाद, यह फाइनेंशियल डिस्क्लोजर कंपनी की वित्तीय स्थिति को लेकर एक बड़ी तस्वीर पेश करता है।

कंपनी के बोर्ड ने इन ऑडिटेड नतीजों को मंजूरी दे दी है, जिससे लिस्टेड एंटिटीज़ (Listed Entities) के लिए जरूरी रेगुलेटरी रिक्वायरमेंट्स (Regulatory Requirements) पूरी हो गई हैं। यह तब हुआ है जब Purple Finance ने मार्च 2026 में BSE को डिलेड डिस्क्लोजर फाइलिंग्स (Delayed Disclosure Filings) के लिए फाइन (Fine) चुकाकर मामला निपटाया था। इसके अलावा, अप्रैल 2026 में कंपनी ने कुछ टेक्निकल इश्यूज (Technical Issues) के कारण इंटरेस्ट पेमेंट्स (Interest Payments) में हुई अस्थायी देरी को भी ठीक कर लिया है। मार्च 2026 में ही कंपनी ने ₹25 करोड़ की नॉन-कनवर्टिबल डिबेंचर (NCD) जारी करने और ₹37.93 करोड़ का पोर्टफोलियो बेचने जैसी स्ट्रेटेजिक फाइनेंशियल मूव्स (Strategic Financial Moves) को मंजूरी दी थी।

AUM में ग्रोथ और एसेट क्वालिटी पर नजर

पिछली कुछ तिमाहियों में घाटा दर्ज होने के बावजूद, Purple Finance ने अपने एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) में ग्रोथ दिखाई है। FY24 में ₹30.5 करोड़ से बढ़कर सितंबर 2025 तक यह ₹163.1 करोड़ हो गया था।

कंपनी के घाटे में कमी और लगातार बिज़नेस एक्टिविटी (Business Activity) से निवेशकों का भरोसा बढ़ सकता है, जो ऑपरेशनल स्टेबिलिटी (Operational Stability) की ओर इशारा करता है। हालांकि, निवेशक एसेट क्वालिटी (Asset Quality) पर बारीकी से नजर रख रहे हैं। 31 मार्च, 2026 तक, Purple Finance ने स्टेज III लोन (Stage III Loans) में ₹350.23 लाख और लॉस एसेट्स (Loss Assets) के तौर पर ₹18.99 लाख क्लासिफाई किए थे। कुल मिलाकर ₹369.22 लाख इन एसेट्स का 1.13% AUM बनता है। यह पर्सेंटेज कम होने के बावजूद, NBFCs की लैंडिंग में क्रेडिट रिस्क (Credit Risk) को दर्शाता है और इस पर लगातार निगरानी की जरूरत है।

सेक्टर और प्रतिस्पर्धी

NBFC सेक्टर में, जहां FY25 में कुल एसेट्स 18.9% बढ़कर ₹61.09 लाख करोड़ हो गए थे, ग्रोथ मुख्य रूप से रिटेल और MSME लेंडिंग से आ रही है और राष्ट्रीय एसेट क्वालिटी में सुधार दिख रहा है। Purple Finance इसी डायनामिक मार्केट में Bajaj Finance, Shriram Finance, Muthoot Finance और Jio Financial Services जैसे बड़े और डाइवर्सिफाइड प्लेयर्स (Diversified Players) के साथ ऑपरेट करती है। ये कंपटीटर्स (Competitors) अक्सर ज़्यादा प्रॉफिटेबिलिटी (Profitability) दिखाते हैं, लेकिन Purple Finance का परफॉर्मेंस रेवेन्यू ग्रोथ के मुकाबले घाटे को कम करने में प्रगति दिखा रहा है।

आगे की राह

आगे चलकर, निवेशकों को एसेट क्वालिटी को समझने के लिए स्टेज III और लॉस एसेट्स के इवोल्यूशन (Evolution) पर नजर रखनी चाहिए, साथ ही रेवेन्यू ग्रोथ की सस्टेनेबिलिटी (Sustainability) और प्रॉफिटेबिलिटी पर इसके असर को भी देखना होगा। कंपनी की बोरिंग कॉस्ट (Borrowing Costs) और ऑपरेटिंग एक्सपेंसेस (Operating Expenses) को मैनेज करने की क्षमता भी अहम होगी। NCD इश्यूएंंस (NCD Issuances) और पोर्टफोलियो मैनेजमेंट (Portfolio Management) जैसी आगे की स्ट्रेटेजिक फाइनेंशियल इनिशिएटिव्स (Strategic Financial Initiatives) कंपनी की भविष्य की दिशा और उसकी कंपिट करने की क्षमता के महत्वपूर्ण इंडिकेटर्स (Indicators) होंगे।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.