NCDs से ₹250 करोड़ जुटाएगी Poonawalla Fincorp
इस फंड जुटाने की पूरी योजना के तहत, कंपनी ₹150 करोड़ के बेस इश्यू के साथ ₹100 करोड़ का ग्रीन्सशू ऑप्शन भी रखेगी, जिससे कुल राशि ₹250 करोड़ तक पहुंच सकती है।
ये डिबेंचर्स अनसिक्योर्ड (Unsecured), रिडीमेबल (Redeemable), रेटेड (Rated) और सबऑर्डिनेटेड (Subordinated) होंगे, जो Tier II कैपिटल के तौर पर गिने जाएंगे। इन्हें प्राइवेट प्लेसमेंट के जरिए BSE Limited पर लिस्ट किया जाएगा।
इस कदम से Poonawalla Fincorp के कैपिटल बेस में जबरदस्त बढ़ोतरी की उम्मीद है, जो इसके कैपिटल एडिक्वेसी रेश्यो (CAR) को और मजबूत करेगा। Tier II कैपिटल के जरिए फंड जुटाना कंपनी को इक्विटी डाइल्यूशन (equity dilution) से बचाता है और शेयरहोल्डर्स के लिए अच्छी खबर है। यह कंपनी की फाइनेंशियल फ्लेक्सिबिलिटी को भी बढ़ाता है, जिससे भविष्य में लेंडिंग और बिजनेस एक्सपेंशन में मदद मिलेगी।
यह कोई नया कदम नहीं है, Poonawalla Fincorp इससे पहले भी Q3 फाइनेंशियल ईयर 24 (Q3 FY24) में ₹200 करोड़ NCDs के जरिए जुटा चुकी है। NBFCs के लिए Tier II कैपिटल जुटाना एक आम रणनीति है ताकि वे रेगुलेटरी मिनिमम से ऊपर कैपिटल बफर बनाए रख सकें।
हालांकि, निवेशकों को कुछ जोखिमों पर भी ध्यान देना होगा। अगर ड्यू डेट के 3 महीने से ज्यादा की देरी होती है, तो कूपन रेट से 2% ज्यादा पेनल्टी लग सकती है। इसके अलावा, ये NCDs सबऑर्डिनेटेड और अनसिक्योर्ड होने के कारण, लिक्विडेशन (liquidation) की स्थिति में सीनियर डेट की तुलना में इनकी प्रायोरिटी कम होगी।
Cholamandalam Investment and Finance Company और Bajaj Finance जैसी बड़ी NBFCs भी अक्सर NCDs के जरिए फंड जुटाती हैं। Q3 FY24 के अंत तक, Poonawalla Fincorp का कंसॉलिडेटेड कैपिटल एडिक्वेसी रेश्यो 21.80% था, जो NBFCs के लिए जरूरी 15% के मिनिमम से काफी ऊपर है।
निवेशकों को अब NCDs के टेनर (tenor), कूपन रेट (coupon rate), और अलॉटमेंट व रिडेम्पशन शेड्यूल का इंतजार रहेगा। BSE पर लिस्टिंग की कन्फर्मेशन और फंड के इस्तेमाल का असर भी बारीकी से देखा जाएगा।
