कैपिटल बढ़ाने की तैयारी
Poonawalla Fincorp Limited (PFL) ने स्टॉक एक्सचेंज को दी जानकारी में बताया है कि कंपनी के फाइनेंस कमेटी ने ₹1,000 करोड़ तक के सिक्योर, रिडीमेबल नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर्स (NCDs) को प्राइवेट प्लेसमेंट के जरिए इश्यू करने की सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। इसमें ₹500 करोड़ का बेस इश्यू और ₹500 करोड़ तक का ग्री ponsel ऑप्शन शामिल है।
फंड का इस्तेमाल और एक्सचेंज पर लिस्टिंग
इन NCDs को BSE पर लिस्ट किया जाएगा। कंपनी का लक्ष्य इस फंड का इस्तेमाल अपनी पूंजी को मजबूत करना और आने वाले समय में बिजनेस एक्टिविटीज और लोन पोर्टफोलियो को एक्सपैंड करना है। यह कंपनी की डेट मार्केट का इस्तेमाल करके फंड जुटाने की स्ट्रैटिजी का हिस्सा है।
यह क्यों अहम है?
PFL के लिए यह डेट इश्यू अहम है क्योंकि इससे कंपनी की बैलेंस शीट मजबूत होगी और लेंडिंग टारगेट्स को पूरा करने के लिए लिक्विडिटी बढ़ेगी। ICRA की तरफ से PFL के NCD प्रोग्राम को 'A+' की रेटिंग मिली है, जो कंपनी की क्रेडिट प्रोफाइल पर भरोसा दिखाती है।
आगे क्या देखना है?
- शेयरहोल्डर्स को कंपनी के डेट-टू-इक्विटी रेशियो में बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।
- फंड का इस्तेमाल कंपनी के रिटेल और MSME सेगमेंट में कैसे होता है, इस पर नजर रहेगी।
- ICRA जैसी रेटिंग एजेंसीज द्वारा भविष्य में क्रेडिट रेटिंग एक्शन पर भी ध्यान देना होगा।
- कंपनी की तरफ से किसी भी नए इक्विटी-रेज़िंग इनिशिएटिव की घोषणा पर नजरें रहेंगी।
इंडस्ट्री में यह आम है
Bajaj Finance और Cholamandalam Investment and Finance Company जैसी बड़ी NBFCs भी अपनी एसेट ग्रोथ को फाइनेंस करने के लिए लगातार NCDs और बैंक लोन जैसे डेट इंस्ट्रूमेंट्स का इस्तेमाल करती हैं। PFL का यह कदम इंडस्ट्री की सामान्य प्रैक्टिस के अनुरूप है।
जोखिमों पर भी नज़र
एक अहम जोखिम यह है कि अगर इंटरेस्ट या प्रिंसिपल पेमेंट में 3 महीने से ज्यादा की देरी होती है, तो लागू कूपन रेट पर 2% का अतिरिक्त पेनल्टी लग सकती है।
