FY26 कंपनी के लिए एक बड़ा मील का पत्थर साबित हुआ है, जहाँ Piramal Finance का कुल एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) ₹1,01,230 करोड़ तक पहुँच गया, जो पिछले साल के मुकाबले 25% ज्यादा है। कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) में 210% की जोरदार उछाल के साथ यह ₹1,506 करोड़ पर दर्ज किया गया।
कंपनी ने साफ किया है कि रिटेल-फोकस्ड NBFC बनने की राह पर वे बिल्कुल सही चल रहे हैं। अब कुल AUM का 85% हिस्सा रिटेल एसेट्स का है, जो एक बड़ा स्ट्रेटेजिक शिफ्ट है।
टेक्नोलॉजी को अपनाने में भी Piramal Finance पीछे नहीं है। Gen-AI का इस्तेमाल FY26 में तीन गुना बढ़ गया, और AI ने कोड जनरेशन में 59% का योगदान दिया।
एसेट क्वालिटी की बात करें तो ग्रॉस नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (GNPA) 2.3% पर स्टेबल रहा। कंपनी ने अपने नॉन-कोर एसेट्स बेचकर ₹6,300 करोड़ भी जुटाए।
आगे के लिए भी कंपनी के लक्ष्य बड़े हैं। FY27 में AUM को 25% तक बढ़ाने और प्रॉफिट में 50% की ग्रोथ का टारगेट है। कंपनी 2028 तक ₹1.5 लाख करोड़ AUM और FY27 की चौथी तिमाही तक लगभग 2.5% का RoAUM (Return on Average Assets Under Management) हासिल करने का लक्ष्य लेकर चल रही है।
पिछले 2-3 सालों में, Piramal Finance ने बड़े कर्ज़ देने वाले (wholesale lender) मॉडल से हटकर रिटेल पर फोकस वाले NBFC के तौर पर खुद को सफलतापूर्वक बदला है। यह बदलाव स्ट्रक्चरल सिंप्लिफिकेशन और टेक्नोलॉजी, खासकर AI के इस्तेमाल से संभव हुआ है, जिससे ऑपरेशनल एफिशिएंसी बढ़ी है।
हालांकि, इस ग्रोथ के साथ कुछ जोखिम भी जुड़े हैं। कंपनी ने यह भी बताया कि दूसरों से रिजेक्ट हुए 16% लोन अप्रूव करने पर 2.8 गुना ज्यादा जोखिम होता है। माइक्रोफाइनेंस में एक नए खिलाड़ी के तौर पर, कंपनी अभी रिपीट कस्टमर बेस का फायदा नहीं उठा पा रही है। बाजार में Bajaj Housing Finance Ltd., Aavas Financiers Ltd. और LIC Housing Finance Ltd. जैसी कंपनियों से कड़ी टक्कर बनी हुई है।
