नए सिरे से तैयारी: EGM में फिर रखा जाएगा प्रस्ताव
Pasupati Fincap Limited के डायरेक्टर्स बोर्ड ने 24 अप्रैल, 2026 को एक नई एक्स्ट्राऑर्डिनरी जनरल मीटिंग (EGM) बुलाने का फैसला किया है। इसका मुख्य उद्देश्य शेयरधारकों से कंपनी का नाम बदलकर Harmanshi Appliances Co. Limited करने और कैपिटल को कम करने की योजना पर उनकी सहमति लेना है।
कंपनी के घाटे को दूर करने की योजना
इस कैपिटल रिडक्शन स्कीम का मकसद कंपनी के ₹5.35 करोड़ के संचित घाटे (accumulated losses) में से लगभग ₹4.47 करोड़ के घाटे को राइट-ऑफ (write-off) करना है। अगर यह योजना सफल होती है, तो कंपनी का पेड-अप कैपिटल ₹4.70 करोड़ से घटकर मात्र ₹0.24 करोड़ रह जाएगा। इसके साथ ही, बोर्ड ने श्रीमती राखी शर्मा को 5 साल के लिए अतिरिक्त डायरेक्टर (Additional Director) के तौर पर नियुक्त करने का भी प्रस्ताव रखा है।
बिजनेस मॉडल में संभावित बदलाव
कंपनी का यह कदम वित्तीय सेवाओं से हटकर अप्लायंसेज (appliances) सेक्टर की ओर झुकाव का संकेत दे सकता है, जैसा कि प्रस्तावित नए नाम से पता चलता है। यह पुनर्गठन (restructuring) कंपनी को अपने घाटे को खत्म करने और एक मजबूत वित्तीय स्थिति प्रस्तुत करने में मदद करेगा।
पिछली बार शेयरधारकों ने ठुकराया था प्रस्ताव
यह Pasupati Fincap का इस तरह के पुनर्गठन के लिए दूसरा प्रयास है। इससे पहले, 12 मार्च, 2026 को हुई EGM में शेयरधारकों ने चार विशेष प्रस्तावों (special resolutions) को खारिज कर दिया था, जिसमें कैपिटल रिडक्शन प्रस्ताव के पक्ष में केवल 20.77% वोट पड़े थे।
कंपनी की कमजोर वित्तीय स्थिति
कंपनी लगातार वित्तीय चुनौतियों का सामना कर रही है, जिसमें घाटा और नेगेटिव इक्विटी (negative equity) शामिल है। 30 सितंबर, 2025 को समाप्त तिमाही के लिए, Pasupati Fincap ने ₹5.33 लाख के रेवेन्यू पर ₹6.86 लाख का नेट लॉस दर्ज किया था। कंपनी की कुल इक्विटी -₹73.76 लाख थी। अनुपालन (compliance) मुद्दों के कारण कंपनी को BSE से ट्रेडिंग के लिए निलंबित भी कर दिया गया है।
प्रस्तावों के सफल होने पर क्या होगा?
अगर शेयरधारक इन प्रस्तावों को मंजूरी देते हैं, तो कंपनी कानूनी रूप से Harmanshi Appliances Co. Limited बन जाएगी। इसका पेड-अप कैपिटल घटकर ₹0.235 करोड़ (₹23.50 लाख) रह जाएगा और बैलेंस शीट से लगभग ₹4.47 करोड़ का संचित घाटा हटा दिया जाएगा।
आगे की राह और जोखिम
इस प्रक्रिया में सबसे बड़ी बाधा शेयरधारकों की मंजूरी हासिल करना है, खासकर पिछली बार की अस्वीकृति को देखते हुए। इसके अलावा, रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज (Registrar of Companies) और संभवतः नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) से नियामक मंजूरी (regulatory approvals) भी आवश्यक होंगी।
इंडस्ट्री से तुलना
Pasupati Fincap के मुकाबले, भारतीय नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी (NBFC) सेक्टर में वृद्धि देखी जा रही है। कंपनी की नैनो-कैप (nano-cap) स्थिति, लगातार घाटा और पिछले एक साल में 30.28% की गिरावट के साथ 52-हफ्ते के निचले स्तर पर शेयर का कारोबार, इसकी अलग स्थिति को दर्शाता है।
मुख्य आंकड़े:
- नेट लॉस (Q2 FY2026): ₹6.86 लाख
- रेवेन्यू (Q2 FY2026): ₹5.33 लाख
- कुल इक्विटी (Q2 FY2026): -₹73.76 लाख
- ऑफसेट किए जाने वाले संचित घाटे: ₹4.47 करोड़
- प्रस्तावित पेड-अप कैपिटल: ₹0.24 करोड़
आगे के कदम
निवेशक 24 अप्रैल को होने वाली EGM के नतीजों पर नजर रखेंगे। पुनर्गठन को लागू करने के लिए इसके बाद की नियामक मंजूरियां महत्वपूर्ण होंगी।
