Paisalo Digital लिमिटेड के प्रमोटर Santanu Agarwal ने कंपनी में अपनी हिस्सेदारी को मजबूत किया है। उन्होंने 15 मई, 2026 को 4,50,000 शेयर खरीदे हैं। इस खरीदारी के बाद, उनके पास अब कंपनी के कुल वोटिंग कैपिटल का 3.86% स्टेक हो गया है।
इस ट्रांजेक्शन से पहले, Santanu Agarwal के पास 3,46,94,000 शेयर (यानी 3.8145% स्टेक) थे। नई खरीदारी के बाद उनके कुल शेयर 3,51,44,000 हो गए हैं।
इस अधिग्रहण की वैल्यू, फेस वैल्यू के आधार पर, ₹4.50 लाख (₹0.05 करोड़) बताई गई है, जो मौजूदा बाजार मूल्य से काफी कम है।
प्रमोटर द्वारा अपनी हिस्सेदारी बढ़ाना अक्सर कंपनी के भविष्य की संभावनाओं और वित्तीय सेहत में विश्वास का संकेत माना जाता है। यह कदम प्रमोटर की प्रतिबद्धता को दर्शाता है और माइनॉरिटी शेयरधारकों के लिए एक सकारात्मक संकेत हो सकता है।
Paisalo Digital लिमिटेड एक सिस्टमैटिकली इम्पोर्टेन्ट एनबीएफसी-एनडी (NBFC-ND) के तौर पर काम करती है। कंपनी डिजिटल लेंडिंग और फाइनेंशियल इन्क्लूजन पर फोकस करती है। यह पर्सनल लोन, एसएमई लोन और माइक्रोफाइनेंस लोन मुख्य रूप से अपने डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए उपलब्ध कराती है।
प्रमोटर Santanu Agarwal का कंपनी में शेयर जमा करने का इतिहास रहा है। इससे पहले भी उन्होंने मई 2024 की शुरुआत में 4,50,000 शेयर खरीदे थे, और जुलाई 2023 में भी एक बड़ी खरीदारी की थी।
हालांकि, निवेशकों को कुछ रेगुलेटरी रिस्क (Regulatory Risks) पर भी गौर करना होगा। दिसंबर 2023 में, सेबी (SEBI) ने Santanu Agarwal पर इनसाइडर ट्रेडिंग (Insider Trading) की कथित गतिविधियों के चलते सिक्योरिटीज के कारोबार पर रोक लगा दी थी। यह मामला Religare Enterprises से जुड़ा था।
अगर हम साथियों (Peers) से तुलना करें, तो Paisalo Digital का प्रमोटर स्टेक 3.86% कुछ हद तक मामूली है। Cholamandalam Investment and Finance Company और Poonawalla Fincorp जैसी कंपनियां अक्सर उच्च प्रमोटर स्टेक रखती हैं, हालांकि उनके बिजनेस मॉडल अलग हैं। वहीं, एक अन्य कंपनी IIFL Finance को मार्च 2024 में आरबीआई (RBI) की ओर से गोल्ड लोन पोर्टफोलियो को लेकर रेगुलेटरी स्क्रूटनी (Regulatory Scrutiny) का सामना करना पड़ा था।
फाइनेंशियल ईयर 2024 के लिए, कंपनी ने स्टैंडअलोन बेसिस पर ₹107.26 करोड़ का प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) दर्ज किया था।
निवेशक आगे Santanu Agarwal और अन्य प्रमोटरों की शेयरहोल्डिंग डिस्क्लोजर्स (Shareholding Disclosures) पर नज़र रखेंगे। वे इस अधिग्रहण के कारणों पर कंपनी की ओर से किसी भी आधिकारिक टिप्पणी का इंतजार करेंगे, खासकर बताई गई तारीख (15 मई, 2026) को देखते हुए। साथ ही, कंपनी के आने वाली तिमाहियों के वित्तीय प्रदर्शन और ग्रोथ ट्रेजेक्टरी पर भी बारीकी से नजर रखी जाएगी।