EVP अविजित किशोर का इस्तीफा: कंपनी में लीडरशिप का संकट गहराया
PTC India Financial Services Ltd (PFS) में एग्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट (EVP) और सीनियर मैनेजमेंट का अहम हिस्सा रहे अविजित किशोर ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने यह फैसला व्यक्तिगत कारणों से लिया है। कंपनी की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, किशोर का इस्तीफा 7 अप्रैल, 2026 से प्रभावी होगा, और कंपनी में उनका आखिरी दिन 6 मई, 2026 होगा, जो 30 दिन के नोटिस पीरियड के बाद आएगा।
लगातार हो रहे बड़े बदलाव
यह इस्तीफा ऐसे समय पर आया है जब कंपनी पहले से ही लीडरशिप में बड़े बदलावों से गुजर रही है। इससे पहले, कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर (MD) और सीईओ (CEO) R. Balaji ने भी इस्तीफा देने का ऐलान किया था, जिनका कार्यकाल 30 जून, 2026 को समाप्त होगा। सीनियर लीडरशिप में ऐसे लगातार हो रहे फेरबदल कंपनी की रणनीतिक दिशा और ऑपरेशनल निरंतरता पर सवाल खड़े कर सकते हैं।
गवर्नेंस से जुड़ी पुरानी समस्याएं
PFS का कॉर्पोरेट गवर्नेंस (Corporate Governance) से जुड़ा इतिहास काफी चुनौतीपूर्ण रहा है। सितंबर 2025 में, तीन स्वतंत्र निदेशकों ने अपने काम में बाधा आने का हवाला देते हुए इस्तीफा दे दिया था। यह स्थिति जनवरी 2022 में भी देखी गई थी, जब गवर्नेंस के उल्लंघन के आरोपों के चलते तीन स्वतंत्र निदेशकों ने इस्तीफा दे दिया था। इन घटनाओं के चलते SEBI (सेबी) ने जांच भी की थी और पूर्व टॉप अधिकारियों पर जुर्माना भी लगाया था, हालांकि बाद में अपीलीय ट्रिब्यूनल ने कुछ प्रतिबंधों को पलट दिया था। ये पिछले मुद्दे कंपनी पर लंबे समय से चल रहे स्क्रूटनी (Scrutiny) को दर्शाते हैं।
निवेशकों पर असर और चुनौतियां
कंपनी को अब EVP पद के लिए नए उत्तराधिकारी की तलाश करनी होगी। यह काम मौजूदा लीडरशिप में हो रहे बदलावों के चलते और भी जटिल हो जाता है। निवेशक कंपनी में लीडरशिप की स्थिरता, संचालन को बनाए रखने की क्षमता और इन बदलावों के रणनीतिक निर्णयों पर पड़ने वाले प्रभाव पर बारीकी से नजर रखेंगे। लगातार हो रहे मैनेजमेंट फेरबदल और नियामक जांच का इतिहास, हितधारकों का भरोसा बनाए रखने में खास चुनौतियां पेश करता है।
इंडस्ट्री के मुकाबले PFS की मुश्किलें
प्रतिस्पर्धी NBFC (Non-Banking Financial Company) सेक्टर में काम करने वाली PFS के सामने Bajaj Finance, Tata Capital, Shriram Finance और Cholamandalam Investment and Finance जैसी बड़ी कंपनियां हैं। जहां ये स्थापित खिलाड़ी भी लीडरशिप में बदलावों का सामना करते हैं, वहीं PFS का गवर्नेंस चिंताओं से जुड़ा कार्यकारी इस्तीफे का इतिहास, लीडरशिप स्थिरता और निवेशक विश्वास के मामले में अनूठी बाधाएं खड़ी करता है।
निवेशक क्या देखेंगे?
आने वाले समय में, नए EVP की नियुक्ति, MD & CEO के कार्यकाल का सुचारू हस्तांतरण, और PFS की लीडरशिप टीम और गवर्नेंस प्रथाओं पर किसी भी नए अपडेट पर नजर रखी जाएगी। इन सीनियर-लेवल बदलावों के बीच कंपनी की ऑपरेशनल गति को बनाए रखने की क्षमता महत्वपूर्ण होगी।