दमदार नतीजों के पीछे का सच:
PNB ने Q4 FY26 में ₹5,225 करोड़ का नेट प्रॉफिट कमाकर एक नया कीर्तिमान रचा है। यह पिछले फाइनेंशियल ईयर की चौथी तिमाही के मुकाबले 14.4% की ग्रोथ को दर्शाता है। बैंक का ग्लोबल बिजनेस 10.7% बढ़कर ₹29.7 लाख करोड़ तक पहुंच गया, जबकि ग्लोबल डिपॉजिट्स 9.2% की उछाल के साथ ₹17.11 लाख करोड़ पर आ गए।
NPA में बड़ी गिरावट, एसेट क्वालिटी हुई मजबूत:
बैंक की एसेट क्वालिटी में बड़ा सुधार देखने को मिला है। ग्रॉस एनपीए (GNPA) साल भर पहले के 3.95% से घटकर 2.95% पर आ गया है। इसी तरह, नेट एनपीए (Net NPA) भी 0.40% से लुढ़ककर 0.29% हो गया है। बैंक ने 97.14% के मजबूत प्रोविजन कवरेज रेशियो (PCR) के साथ पर्याप्त प्रोविजनिंग बनाए रखी है।
रणनीति में बदलाव, अब RAM सेगमेंट पर फोकस:
मैनेजमेंट अब कम यील्ड वाले कॉर्पोरेट लोन पर निर्भरता कम कर रहा है। बैंक ने इंटरनेशनल बैंकिंग और पोर्टफोलियो क्रेडिट (IBPC) एसेट्स में ₹18,231 करोड़ की कटौती की है। इसके बजाय, लोन बुक यील्ड को बेहतर बनाने के लिए बैंक का पूरा जोर अब ज़्यादा मार्जिन वाले रिटेल, एग्रीकल्चर और एमएसएमई (RAM) सेगमेंट पर है।
आगे का रास्ता और चुनौतियां:
फाइनेंशियल ईयर 2027 के लिए, PNB ने 12% से 13% तक के क्रेडिट ग्रोथ का अनुमान लगाया है, जबकि नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) ग्रोथ 7% रहने की उम्मीद है। बैंक अपने नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) को 2.6% से 2.7% के बीच रहने का अनुमान लगा रहा है।
हालांकि, डिपॉजिट रेट्स में बढ़ोत्तरी और बॉन्ड यील्ड्स के कारण मार्जिन पर दबाव बना हुआ है, जिससे NIM के अनुमानों में यह कमी आई है। CASA रेश्यो में उतार-चढ़ाव भी फंडिंग कॉस्ट को प्रभावित कर सकता है। स्पेशल मेंशन अकाउंट्स (SMA) ₹41,534 करोड़ यानी 3.30% पर हैं, जिन पर लगातार नज़र रखने की ज़रूरत है।
पीयर कंपैरिजन (Peer Comparison):
अगर बात अन्य बैंकों की करें, तो स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने Q4 FY24 में ₹20,698 करोड़ का नेट प्रॉफिट और 2.1% GNPA दर्ज किया। बैंक ऑफ बड़ौदा का Q4 FY24 नेट प्रॉफिट ₹4,159 करोड़ और GNPA 2.1% था। वहीं, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया ने Q4 FY24 में ₹3,700 करोड़ का नेट प्रॉफिट और 3.18% GNPA रिपोर्ट किया।
खास आंकड़े और निवेशक क्या देखें?
Q4 FY26 के अंत तक PNB का ग्लोबल बिजनेस ₹29.7 लाख करोड़ और ग्लोबल डिपॉजिट ₹17.11 लाख करोड़ रहा। बैंक का कैपिटल एडिक्वेसी रेशियो (CRAR) 17.74% था।
आगे चलकर, निवेशकों की नज़र इस बात पर रहेगी कि PNB अपने RAM सेगमेंट के लक्ष्य (जो 60% है) को कितना हासिल कर पाता है। साथ ही, बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच डिपॉजिट की लागत को मैनेज करने और NIMs को बेहतर बनाने की बैंक की क्षमता महत्वपूर्ण होगी। एसेट क्वालिटी में और सुधार, खासकर MSME और एग्रीकल्चर से जुड़े लोन में, तथा एक्सपेक्टेड क्रेडिट लॉस (ECL) प्रोविजनिंग नॉर्म्स के लागू होने का असर भी देखा जाएगा।
