PNB ने यह जानकारी भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) को औपचारिक रूप से दे दी है। यह लोन Reliance Telecom Ltd (RTL) और Reliance Communications (RCOM) द्वारा जून 2019 में कॉर्पोरेट इंसॉल्वेंसी रेजोल्यूशन प्रोसेस (CIRP) शुरू करने से पहले का है।
इस 'फ्रॉड' टैग से RCOM और RTL के रिजोल्यूशन प्लान (Resolution Plan) में बड़ी चुनौतियां खड़ी हो गई हैं। नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) में चल रही इस प्रक्रिया पर अब अधिक बारीकी से नजर रखी जाएगी, और संभावित खरीदारों या रिवाइवल प्लान की अपील पर भी असर पड़ सकता है।
Reliance Communications और उसकी सब्सिडियरी Reliance Telecom, दोनों ही जून 2019 में बड़े कर्ज़ के बोझ तले कॉर्पोरेट इंसॉल्वेंसी रेजोल्यूशन प्रोसेस (CIRP) में दाखिल हुई थीं और तब से NCLT की देखरेख में समाधान की तलाश कर रही हैं।
PNB द्वारा RBI को दी गई इस रिपोर्ट के बाद, नियामकों (Regulators) की तरफ से और जांच की उम्मीद है। यह 'फ्रॉड' वर्गीकरण पूर्व-CIRP लोन से संबंधित कानूनी चुनौतियों को भी खोल सकता है, जिससे रिजोल्यूशन प्लान को अंतिम रूप देने में और देरी हो सकती है।
