SEBI के नियमों का पालन: इनसाइडर ट्रेडिंग पर लगेगी लगाम!
SEBI (Securities and Exchange Board of India) के 'Prohibition of Insider Trading Regulations, 2015' के तहत, सभी लिस्टेड कंपनियां अपने तिमाही नतीजों (quarterly results) की घोषणा से पहले एक निश्चित अवधि के लिए कंपनी के शेयरों की खरीद-बिक्री पर रोक लगाती हैं। इसे 'ट्रेडिंग विंडो क्लोजर' (Trading Window Closure) कहा जाता है।
Muthoot Finance का एक्शन: कब और क्यों?
इसी क्रम में, Muthoot Finance Limited ने भी 31 मार्च 2026 के कारोबारी सत्र (business hours) के बंद होने के साथ ही डेजिग्नेटेड कर्मचारियों और उनके क्लोज रिलेटिव्स (close relatives) के लिए शेयर ट्रेडिंग विंडो बंद कर दी है। यह विंडो कंपनी द्वारा Q4 FY26 (31 मार्च 2026 को समाप्त तिमाही) के वित्तीय नतीजों की आधिकारिक घोषणा के 48 घंटे बाद ही दोबारा खुलेगी।
इस कदम का मुख्य उद्देश्य किसी भी ऐसे व्यक्ति को कंपनी के शेयर खरीदने या बेचने से रोकना है, जिसके पास नतीजों से जुड़ी गैर-सार्वजनिक, प्राइस-सेंसिटिव (price-sensitive) जानकारी हो। इससे मार्केट में पारदर्शिता बनी रहती है और निवेशकों का भरोसा बढ़ता है।
कंपनी का हालिया प्रदर्शन और अन्य जानकारी
भारत की सबसे बड़ी गोल्ड लोन एनबीएफसी (NBFC) कंपनी Muthoot Finance, जो 6,100 से अधिक ब्रांचों का संचालन करती है, ने हाल ही में Q3 FY26 में दमदार प्रदर्शन दिखाया था। कंपनी का स्टैंडअलोन नेट प्रॉफिट पिछले साल की तुलना में 95% बढ़कर ₹2,656 करोड़ रहा था, जबकि कंसोलिडेटेड AUM (एसेट अंडर मैनेजमेंट) 31 दिसंबर 2025 तक ₹1.64 लाख करोड़ तक पहुंच गया था।
हालांकि, यह ध्यान देने योग्य है कि जुलाई 2024 में Muthoot Finance को आरबीआई (RBI) द्वारा केवाईसी (KYC) नियमों के पालन में कोताही बरतने के लिए ₹1.90 लाख का जुर्माना भी भरना पड़ा था।
इंडस्ट्री प्रैक्टिस
यह ट्रेडिंग विंडो क्लोजर की प्रथा वित्तीय सेवा क्षेत्र में काफी आम है। Muthoot Finance के प्रतिद्वंद्वी, जैसे Manappuram Finance और IIFL Finance, भी अपने नतीजों से पहले इसी तरह के उपाय अपनाते हैं।
कंपनी जल्द ही Q4 FY26 नतीजों को मंजूरी देने के लिए बोर्ड मीटिंग की तारीख की घोषणा कर सकती है। नतीजों के ऐलान के बाद ही ट्रेडिंग विंडो फिर से खुलेगी।
