McLeod Russel Share Price: कर्ज से मिली बड़ी राहत! NARCL के साथ डील फाइनल, **10%** हिस्सेदारी का सौदा

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AuthorNeha Patil|Published at:
McLeod Russel Share Price: कर्ज से मिली बड़ी राहत! NARCL के साथ डील फाइनल, **10%** हिस्सेदारी का सौदा
Overview

McLeod Russel India के निवेशकों के लिए एक बड़ी खबर आई है। कंपनी ने National Asset Reconstruction Company Ltd (NARCL) के साथ अपने कर्ज के बोझ को कम करने के लिए एक महत्वपूर्ण डील फाइनल कर ली है। इस समझौते के तहत, McLeod Russel **₹1,050 करोड़** का भुगतान फरवरी **2029** तक करेगी, और बदले में NARCL कंपनी में **10%** इक्विटी स्टेक (equity stake) हासिल करेगी।

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डेट रीस्ट्रक्चरिंग (Debt Restructuring) की राह आसान

McLeod Russel India ने अपनी वित्तीय स्थिति को सुधारने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। कंपनी ने National Asset Reconstruction Company Ltd (NARCL) से 75.02% लेंडर्स (lenders) की ओर से मिले डेट रीस्ट्रक्चरिंग के सैंक्शन लेटर (sanction letter) को स्वीकार कर लिया है। यह डील कंपनी को ₹1,050 करोड़ का भुगतान फरवरी 2029 तक करने की मोहलत देगी, जो कि कर्ज के 'सस्टेनेबल पोर्शन' (sustainable portion) के लिए है।

NARCL को मिलेगी 10% हिस्सेदारी

इस डील का एक अहम हिस्सा यह है कि NARCL, कंपनी के 'अनसस्टेनेबल डेट' (unsustainable debt) को इक्विटी में कन्वर्ट करके McLeod Russel में 10% की इक्विटी स्टेक (equity stake) हासिल करेगा। इसके साथ ही, कंपनी के प्रमोटर (promoter) शेयर्स को भी जरूरी अप्रूवल (approval) मिलने पर प्लेज (pledge) किया जाएगा। यह कदम कंपनी के लॉन्ग-टर्म डेट बर्डन (debt burden) को कम करने और उसकी वित्तीय सेहत को स्थिर करने में मदद करेगा।

सालों की वित्तीय मुश्किलों का हल?

दुनिया की सबसे बड़ी चाय उत्पादक कंपनी McLeod Russel पिछले कई सालों से भारी कर्ज और वित्तीय संकट से जूझ रही थी। पिछली इंटर-कॉर्पोरेट डिपॉजिट (inter-corporate deposit) और McNally Bharat Engineering जैसी कंपनियों को दिए गए लोन के कारण कंपनी पर कर्ज का भारी बोझ था। 2018 से कई रीस्ट्रक्चरिंग प्रपोजल (restructuring proposal) फेल हो चुके थे। मार्च 2025 में, कंपनी के ₹1,104.69 करोड़ के कर्ज का बड़ा हिस्सा NARCL को 36% डिस्काउंट पर ट्रांसफर किया गया था, जिससे आज की इस डील का रास्ता साफ हुआ।

कंपनी की वर्तमान वित्तीय स्थिति

हालांकि, डील के बावजूद, कंपनी पर अभी भी वित्तीय दबाव है। मार्च 2026 की शुरुआत तक, कंपनी का डेट-टू-इक्विटी रेशियो (debt-to-equity ratio) 29.75 गुना और डेट-टू-EBITDA (debt-to-EBITDA) 28.74 गुना था। फाइनेंशियल ईयर (financial year) मार्च 2025 में कंपनी को ₹197.87 करोड़ का नेट लॉस (net loss) हुआ था।

डील से क्या उम्मीदें?

  • स्पष्ट डेट फ्रेमवर्क: NARCL को भुगतान की एक निश्चित समय-सीमा तय होने से कर्ज का एक बड़ा हिस्सा व्यवस्थित होगा।
  • रणनीतिक साझेदारी: NARCL का 10% स्टेक कंपनी की रिकवरी में उसकी सीधी भागीदारी सुनिश्चित करता है।
  • प्रमोटर की प्रतिबद्धता: प्लेज किए गए प्रमोटर शेयर्स कंपनी के प्रति उनकी प्रतिबद्धता दिखाते हैं।
  • ऑपरेशनल फोकस: डेट के मुद्दे कुछ हद तक सुलझने से मैनेजमेंट अब कंपनी के ऑपरेशंस (operations) और ग्रोथ (growth) पर ज्यादा ध्यान दे पाएगा।

आगे की राह और जोखिम

इस डील के सफल होने के लिए रेगुलेटरी (regulatory) और स्टेकहोल्डर (stakeholder) अप्रूवल (approval) मिलना जरूरी है। साथ ही, बचे हुए 24.98% लेंडर्स (lenders) के साथ एग्रीमेंट (agreement) भी महत्वपूर्ण होगा। कंपनी को 2029 तक ₹1,050 करोड़ का भुगतान करना होगा, जो कि ऑपरेशनल चुनौतियों के बीच एक बड़ा काम है। ICRA द्वारा उठाए गए गवर्नेंस (governance) संबंधी मुद्दों पर भी ध्यान देना होगा।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.