Mathew Easow Research Securities Ltd ने SEBI के नियमों के तहत खुद को 'Large Corporate' वर्गीकरण से बाहर रखने की आधिकारिक घोषणा की है। कंपनी ने बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) को सूचित किया है कि वे इस श्रेणी में नहीं आते हैं, जिससे उन्हें बड़े कॉरपोरेशन्स पर लागू होने वाले सख्त नियम-कायदों से राहत मिल गई है।
यह स्थिति कंपनी को ग्रोथ के लिए फंड जुटाने (fundraising) के मामले में अधिक फ्लेक्सिबिलिटी (flexibility) देती है। 'Large Corporate' के तौर पर वर्गीकृत होने का मतलब होता है कि कंपनियों को अपने नए कर्जों (borrowings) का एक निश्चित हिस्सा डेट सिक्योरिटीज (debt securities) के ज़रिए ही जुटाना पड़ता है। Mathew Easow Research Securities Ltd अब इस बाध्यता से मुक्त है, जिससे उनकी फाइनेंसिंग स्ट्रैटेजी (financing strategy) आसान हो जाएगी।
SEBI ने 26 नवंबर 2018 को 'Large Corporate' फ्रेमवर्क की शुरुआत की थी, ताकि भारतीय डेट मार्केट को बढ़ावा दिया जा सके। शुरुआत में, ₹100 करोड़ या उससे अधिक की लॉन्ग-टर्म बोरिंग्स (long-term borrowings) और 'AA' या उससे ऊपर की क्रेडिट रेटिंग वाली लिस्टेड एंटिटीज को LC माना जाता था, और उन्हें अपने इंक्रीमेंटल बोरिंग्स का कम से कम 25% डेट मार्केट से जुटाना पड़ता था। हालांकि, अक्टूबर 2023 में इस सीमा को बढ़ाकर ₹1000 करोड़ कर दिया गया।
इस घोषणा के बाद, Mathew Easow Research Securities Ltd अब SEBI के अनिवार्य डेट मार्केट बोरिंग नॉर्म्स (debt market borrowing norms) के दायरे में नहीं आएगी। कंपनी को किसी विशेष प्रतिशत फंड को डेट इश्यूएंस (debt issuances) के ज़रिए जुटाने की रेगुलेटरी ऑब्लिगेशन (regulatory obligation) का पालन नहीं करना होगा। साथ ही, LC स्टेटस से संबंधित कंप्लायंस डिस्क्लोजर्स (compliance disclosures) की ज़रूरत भी खत्म हो गई है।
यह एक आम चलन बनता जा रहा है। हाल ही में P&G Hygiene and Health Care Limited, Modis Navnirman Ltd., और Modern Shares And Stockbrokers Limited जैसी कई अन्य लिस्टेड एंटिटीज ने भी SEBI के 'Large Corporate' फ्रेमवर्क के तहत अपनी अयोग्यता की पुष्टि की है। यह उन कंपनियों के लिए आम है जो निर्दिष्ट बोरिंग थ्रेशोल्ड (borrowing thresholds) से नीचे हैं।
