कृष्णा कैपिटल की EGM: कंट्रोल बदलने और ₹87 करोड़ जुटाने की डील पर शेयरहोल्डर्स का फैसला
Krishna Capital & Securities Limited ने 25 अप्रैल 2026 को एक एक्स्ट्रा ऑर्डिनरी जनरल मीटिंग (EGM) बुलाई है। इस मीटिंग का मुख्य एजेंडा कंपनी के स्वामित्व में बड़े बदलाव और लगभग ₹87 करोड़ की पूंजी जुटाने से जुड़ी एक महत्वपूर्ण डील को मंजूरी दिलाना है।
ई-वोटिंग की प्रक्रिया 22 अप्रैल 2026 से शुरू होकर 24 अप्रैल 2026 को समाप्त होगी। ई-वोटिंग के लिए पात्रता की कट-ऑफ डेट 17 अप्रैल 2026 तय की गई है।
क्यों है यह मीटिंग इतनी अहम?
यह EGM कंपनी के भविष्य के लिए एक टर्निंग पॉइंट साबित हो सकती है। शेयरहोल्डर्स एक व्यापक सौदे पर वोट करेंगे, जिसे बोर्ड ने 26 मार्च 2026 को मंजूरी दी थी। इस सौदे में कंपनी का कंट्रोल एक नए मैनेजमेंट को सौंपना और एक बड़ी पूंजी जुटाना शामिल है। इस मीटिंग का नतीजा यह तय करेगा कि प्रस्तावित नया मैनेजमेंट और फंडिंग स्ट्रक्चर आगे बढ़ पाएगा या नहीं।
डील में क्या है खास?
बोर्ड द्वारा मंजूर किए गए प्रस्तावों के अनुसार, कंपनी एक शेयर परचेज़ एग्रीमेंट (SPA) के तहत 42.87% तक की हिस्सेदारी ₹27.08 करोड़ में अधिग्रहित करेगी। इसके साथ ही, ₹20 प्रति शेयर के भाव पर 3 करोड़ इक्विटी शेयर का प्रेफरेंशियल इश्यू लाया जाएगा, जिससे ₹60 करोड़ जुटाए जाएंगे। इन कदमों से कंपनी का कंट्रोल बदलने के साथ-साथ ऑथराइज्ड शेयर कैपिटल को ₹4 करोड़ से बढ़ाकर ₹34 करोड़ करने की भी आवश्यकता होगी।
गौरतलब है कि कंपनी पहले पीएमएलए (PMLA) नियमों के अनुपालन में कोताही के कारण FIU-IND द्वारा 'हाई रिस्क फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशन' के रूप में पहचानी गई थी। पिछले फाइनेंशियल ईयर FY2025-2026 में, कंपनी ने ₹0.57 करोड़ का रेवेन्यू और ₹0.12 करोड़ का मुनाफा दर्ज किया था।
शेयरहोल्डर्स के लिए क्या होगा असर?
यदि शेयरहोल्डर्स EGM में इन प्रस्तावों को मंजूरी देते हैं, तो कृष्णा कैपिटल की ओनरशिप स्ट्रक्चर में बड़ा बदलाव आएगा। नए प्रमोटर्स कंपनी में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाएंगे और कैपिटल इन्फ्यूजन से कंपनी की वित्तीय स्थिति मजबूत होगी। हालांकि, प्रेफरेंशियल शेयर इश्यू के कारण मौजूदा शेयरधारकों को डाइल्यूशन का सामना करना पड़ सकता है, भले ही इश्यू की कीमत मौजूदा बाजार भाव से प्रीमियम पर हो। कंट्रोल में बदलाव के चलते सेबी (SEBI) के नियमों के अनुसार पब्लिक शेयरहोल्डर्स के लिए एक ओपन ऑफर भी लाना होगा।
जोखिम जिन पर रहेगी नजर:
- शेयरहोल्डर की मंजूरी: EGM का नतीजा महत्वपूर्ण है; अगर मंजूरी नहीं मिली तो यह सभी सौदे रुक जाएंगे।
- डाइल्यूशन: प्रेफरेंशियल इक्विटी इश्यू के कारण मौजूदा शेयरधारकों की हिस्सेदारी कम होगी।
- नियामक मंजूरी: SPA और प्रेफरेंशियल इश्यू, जरूरी वैधानिक और नियामक मंजूरियों पर निर्भर हैं।
- PMLA अनुपालन: FIU-IND द्वारा 'हाई रिस्क' घोषित होने से कंपनी पर आगे भी जांच का शिकंजा कस सकता है।
