यह 'सक्षम निवेषक' अभियान 1 अप्रैल 2026 को शुरू हुआ है और 9 जुलाई 2026 तक जारी रहेगा। इसके तहत, शेयरधारक बैंक के साथ मिलकर अपने KYC रिकॉर्ड्स को अपडेट कर सकते हैं और भूले-बिसरे या अनक्लेम्ड डिविडेंड का दावा कर सकते हैं। बैंक फिजिकल और डीमैट दोनों तरह के शेयरों के लिए यह प्रक्रिया आसान बना रहा है।
यह कदम निवेशकों के लिए अपने वाजिब हक वाले पैसों को सुरक्षित करने का एक बड़ा मौका है। अनक्लेम्ड डिविडेंड सीधे तौर पर शेयरधारकों का ही पैसा है। 9 जुलाई की अंतिम तिथि से पहले इसे क्लेम न करने पर, यह फंड स्थायी रूप से IEPFA के पास चला जाएगा। यह पहल KVB की गुड कॉरपोरेट गवर्नेंस और शेयरधारक संचार के प्रति प्रतिबद्धता को भी दर्शाती है।
बता दें कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) जैसे नियामक निकायों के नियमों के अनुसार, वित्तीय संस्थानों को एक निश्चित अवधि, जो आमतौर पर 10 साल होती है, के बाद अनक्लेम्ड जमाओं और डिविडेंड को IEPFA में ट्रांसफर करना अनिवार्य होता है। बैंक अक्सर इन नियमों का पालन करने, निवेशक संबंधों को बेहतर बनाने और पुराने संपर्क विवरण या संचार की कमी के कारण अनक्लेम्ड रहे फंड को वितरित करने के लिए ऐसे जागरूकता अभियान चलाते हैं।
शेयरधारकों को सलाह दी जाती है कि वे 9 जुलाई 2026 की डेडलाइन का इंतजार न करें और जल्द से जल्द अपना KYC अपडेट करा लें तथा किसी भी लंबित डिविडेंड का दावा कर दें। ऐसा करके वे अपने एसेट्स को IEPFA में स्थायी रूप से ट्रांसफर होने से बचा सकते हैं।
Karur Vysya Bank की यह कवायद बैंकिंग सेक्टर में समान प्रयासों का ही हिस्सा है। City Union Bank और South Indian Bank जैसे बैंक भी नियमित रूप से शेयरधारकों को जोड़ने और अनक्लेम्ड एसेट्स के प्रबंधन के लिए ऐसे अभियान चलाते हैं, जो मजबूत निवेशक संबंध बनाए रखने और नियामक आवश्यकताओं का पालन करने के लिए महत्वपूर्ण है।
