SEBI के नियमों का सख्ती से पालन
SEBI (प्रोहिबिशन ऑफ इनसाइडर ट्रेडिंग) रेगुलेशंस, 2015 के तहत, Jayabharat Credit Limited ने 1 अप्रैल, 2026 से अपनी ट्रेडिंग विंडो बंद कर दी है। इस कदम का मुख्य उद्देश्य कंपनी के डायरेक्टर्स, प्रमोटर्स और अन्य डेजिग्नेटेड एम्प्लॉइज को चौथी तिमाही और पूरे फाइनेंशियल ईयर 2026 के ऑडिटेड फाइनेंशियल रिजल्ट्स के सार्वजनिक होने से पहले किसी भी सिक्योरिटीज की ट्रेडिंग करने से रोकना है। यह प्रक्रिया मार्केट में निष्पक्षता बनाए रखने और इनसाइडर ट्रेडिंग पर लगाम लगाने के लिए ज़रूरी है।
कंपनी की वर्तमान स्थिति चिंताजनक
Jayabharat Credit Limited, जिसकी स्थापना 1943 में हुई थी, एक समय डिविडेंड देने वाली प्रमुख कंपनी थी। हालांकि, हाल के वर्षों में कंपनी की हालत काफी नाजुक हो गई है। यह अब बड़े पैमाने पर नॉन-ऑपरेशनल (Non-operational) एनबीएफसी (NBFC) के रूप में काम कर रही है। कंपनी पिछले कई क्वार्टर्स से ज़ीरो रेवेन्यू (Zero Revenue) रिपोर्ट कर रही है, और उस पर भारी एक्युमलेटेड लॉसेस (Accumulated Losses) हैं, जिसके कारण इसका नेट वर्थ भी नेगेटिव (Negative Net Worth) हो गया है। कंपनी का संचालन मुख्य रूप से प्रमोटर फाइनेंशियल सपोर्ट पर निर्भर है।
ट्रेडिंग पर पाबंदियां
1 अप्रैल, 2026 से, कंपनी के डेजिग्नेटेड एम्प्लॉइज और उनके इमीडिएट रिलेटिव्स Jayabharat Credit की सिक्योरिटीज में ट्रेड नहीं कर पाएंगे। यह पाबंदी कंपनी द्वारा अपने ऑडिटेड फाइनेंशियल रिजल्ट्स की घोषणा के 48 घंटे बाद तक लागू रहेगी।
लेटेस्ट फाइनेंशियल स्नैपशॉट
31 मार्च, 2025 तक के आंकड़ों के अनुसार, कंपनी पर कुल एक्युमलेटेड लॉसेस ₹7,553.67 लाख थे और नेगेटिव नेट वर्थ ₹6,164.54 लाख था। वहीं, 31 दिसंबर, 2025 को समाप्त हुई तिमाही में, कंपनी ने ₹0.43 लाख की टोटल इनकम पर ₹27.50 लाख का नेट लॉस दर्ज किया था।
आगे क्या?
निवेशक अब Jayabharat Credit के Q4 और पूरे FY26 के ऑडिटेड फाइनेंशियल रिजल्ट्स के ऐलान का इंतजार कर रहे हैं। साथ ही, कंपनी के भविष्य की योजनाओं और उसके संचालन की स्थिति को लेकर किसी भी नई रेगुलेटरी फाइलिंग या घोषणा पर बारीक नजर रखी जाएगी।
