यह मांग सेंट्रल GST कमिश्नरेट, जम्मू की ओर से 23 मार्च 2026 को जारी की गई थी, जो 23 फरवरी 2020 से मार्च 2024 तक की अवधि को कवर करती है। इस ₹404.02 करोड़ की कुल मांग में ₹202.01 करोड़ का मूल टैक्स अमाउंट और उतनी ही राशि (₹202.01 करोड़) ब्याज और पेनाल्टी के तौर पर शामिल है।
GST अधिकारियों का कहना है कि बैंक के इंटरनल ट्रांसफर प्राइसिंग मैकेनिज्म (TPM) यानी आंतरिक ट्रांसफर को टैक्सेबल फाइनेंशियल सर्विसेज के तौर पर वर्गीकृत किया गया है।
हालांकि, J&K Bank इस वर्गीकरण से कतई सहमत नहीं है। बैंक का तर्क है कि ये इंटरनल ट्रांसफर सिर्फ कागजी (notional) हैं और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के दिशानिर्देशों के अनुसार ही किए जाते हैं। ऐसे में, बैंक इस आदेश को कानूनी रास्ते से चुनौती देने की पूरी तैयारी में है। बैंक के मैनेजमेंट को उम्मीद है कि इस मामले के समाधान से उसकी वित्तीय स्थिति पर कोई खास असर नहीं पड़ेगा।
यह टैक्स विवाद वित्तीय संस्थानों के लिए आम हैं, खासकर जब सेवाओं के बंटवारे या आंतरिक विभागों के बीच के लेन-देन का मसला आता है। HDFC Bank, ICICI Bank और State Bank of India जैसे अन्य बड़े बैंक भी इसी तरह के टैक्स और रेगुलेटरी परिदृश्यों से गुजरते रहते हैं। हालांकि, J&K Bank के लिए इस बार डिमांड की रकम काफी बड़ी है।
अगर बैंक की कानूनी चुनौती सफल नहीं होती है, तो उसे ₹404.02 करोड़ का भुगतान करना पड़ सकता है, जो उसकी प्रॉफिटेबिलिटी पर असर डाल सकता है। शेयरहोल्डर्स इस कानूनी लड़ाई पर बारीकी से नजर रखेंगे।