शेयरधारकों का जोरदार समर्थन
यह महत्वपूर्ण फैसला पोस्टल बैलेट (Postal Ballot) प्रक्रिया के जरिए लिया गया, जिसमें शेयरधारकों ने तीन नए डायरेक्टर्स की नियुक्ति को तहे दिल से समर्थन दिया। श्री अजय रोत्ति जयतिर्था (Mr. Ajay Rotti Jayathirtha) को 3,79,66,931 वोट मिले, जो कुल वोटों का 99.99% है। वहीं, श्रीमती मालिनी बी मल्लिकार्जुन (Mrs. Malini B Mallikarjun) को 3,79,66,422 वोट प्राप्त हुए, यह भी 99.99% रहा। श्री पंकज राजदान (Mr. Pankaj Razdan) को 3,78,96,240 वोट मिले, यानी 99.81% समर्थन। इन सभी डायरेक्टर्स को पांच साल के कार्यकाल के लिए नियुक्त किया गया है, जो बैंक के दीर्घकालिक रणनीतिक मार्गदर्शन पर फोकस को दर्शाता है।
बोर्ड गवर्नेंस और स्ट्रेटेजी में होगा सुधार
इन स्वतंत्र डायरेक्टर्स का बोर्ड में शामिल होना बैंक के लिए बेहद अहम है। माना जा रहा है कि ये अपनी निष्पक्ष राय, विशेष स्किल्स और बेहतर ओवरसाइट के जरिए बैंक के स्ट्रेटेजिक निर्णय लेने, रिस्क मैनेजमेंट और रेगुलेटरी कंप्लायंस (Regulatory Compliance) को मजबूत करेंगे। इनसे बैंक की लीडरशिप टीम को खास तौर पर फाइनेंस और स्ट्रेटेजी जैसे क्षेत्रों में मदद मिलने की उम्मीद है।
बैंक का इतिहास और सेक्टर की चुनौतियां
Jana Small Finance Bank, जो 2018 में Janalakshmi Financial Services से SFB बनी थी, ने बाजार के उतार-चढ़ाव का सामना किया है। 2016 के नोटबंदी के बाद कंपनी को कुछ नुकसान भी झेलना पड़ा था। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अक्टूबर 2025 में बैंक के यूनिवर्सल बैंक बनने के आवेदन को भी अपूर्ण मानदंडों के चलते वापस कर दिया था। यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि श्री अजय रोत्ति और श्री पंकज राजदान को पहले 2 फरवरी 2026 को और श्रीमती मालिनी बी मल्लिकार्जुन को 20 मार्च 2026 को एडिशनल इंडिपेंडेंट डायरेक्टर्स के तौर पर पांच साल के लिए नियुक्त किया गया था, और इस वोटिंग से उनकी नियुक्ति को अंतिम मंजूरी मिली है।
फिलहाल, स्मॉल फाइनेंस बैंक (SFB) सेक्टर को भी कुछ चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, जैसे कि हाई स्टाफ एट्रीशन (High Staff Attrition) और ऑपरेशनल दिक्कतें। माइक्रोफाइनेंस (MFI) पोर्टफोलियो में बढ़ता स्ट्रेस (Stress) एक बड़ी चिंता है, जहाँ ग्रॉस नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (GNPA) फाइनेंशियल ईयर 25 में बढ़कर 6.8% हो गया था। यह सेक्टर की एसेट क्वालिटी और प्रॉफिटेबिलिटी को प्रभावित कर सकता है।
आगे क्या?
AU Small Finance Bank और Ujjivan Small Finance Bank जैसे अन्य प्रमुख SFBs भी अपने बोर्ड की मजबूती और गवर्नेंस पर जोर देते हैं। ऐसे में, Jana SFB का यह कदम इस दिशा में एक सकारात्मक संकेत है। अब निवेशक इस बात पर नजर रखेंगे कि ये नए डायरेक्टर्स बैंक की स्ट्रेटेजिक दिशा और ऑपरेशनल फैसलों को कितनी प्रभावी ढंग से प्रभावित करते हैं। साथ ही, सेक्टर-व्यापी चुनौतियों से निपटना और भविष्य में यूनिवर्सल बैंकिंग लाइसेंस की महत्वाकांक्षाएं भी निवेशकों के लिए अहम रहेंगी।
