Q4 में सुधार, पर पूरे साल की कमाई में भारी गिरावट
IndusInd Bank ने 31 मार्च 2026 को समाप्त हुए वित्तीय वर्ष के नतीजे जारी किए हैं। चौथी तिमाही (Q4 FY26) में बैंक का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट ₹594.17 करोड़ रहा, जबकि पिछले साल की इसी अवधि में ₹2,328.87 करोड़ का घाटा दर्ज किया गया था। इस तिमाही में बैंक का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू 12.13% बढ़कर ₹12,719.08 करोड़ हो गया।
इसके बावजूद, पूरे फाइनेंशियल ईयर 2026 में बैंक का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट 65.47% गिरकर ₹889.34 करोड़ रह गया, जो पिछले फाइनेंशियल ईयर (FY25) में ₹2,575.54 करोड़ था। पूरे साल का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू भी 5.11% घटकर ₹53,479.87 करोड़ हो गया, जो पिछले साल ₹56,358.10 करोड़ था। बोर्ड ने शेयरहोल्डर्स के लिए ₹1.50 प्रति शेयर का फाइनल डिविडेंड (Final Dividend) भी रिकमेंड किया है।
सब्सिडियरी Bharat Financial Inclusion Limited (BFIL) की मुश्किलें
बैंक की सब्सिडियरी Bharat Financial Inclusion Limited (BFIL) लगातार चिंताओं का कारण बनी हुई है। BFIL के स्टेटुटरी ऑडिटर ने आय की पहचान (Income Recognition) और गवर्नेंस से जुड़ी समस्याओं का हवाला देते हुए अपनी रिपोर्ट में क्वालीफाइड ओपिनियन (Qualified Opinion) जारी करना जारी रखा है। इसके अलावा, बैंक अपने डेरिवेटिव ट्रेड्स (Derivative Trades) में लगभग ₹1,960 करोड़ की अकाउंटिंग विसंगतियों (Accounting Discrepancies) को भी ठीक करने का प्रयास कर रहा है। माइक्रोफाइनेंस ऑपरेशंस में फी इनकम (Fee Income) की गलत पहचान जैसे मुद्दे भी सामने आए हैं। इन अनियमितताओं के कारण हाल के समय में भारी प्रोविजन (Provision) और वित्तीय समायोजन (Financial Adjustments) करने पड़े हैं।
निवेशकों की नजरें आगे पर
शेयरहोल्डर्स अब BFIL के क्वालीफाइड ऑडिट ओपिनियन को हल करने और पिछली अकाउंटिंग गड़बड़ियों को सुधारने की IndusInd Bank की रणनीति पर नजरें गड़ाए हुए हैं। हालांकि घोषित डिविडेंड थोड़ी राहत दे सकता है, लेकिन मुख्य चिंता सतत लाभप्रदता (Sustained Profitability) हासिल करने और एसेट क्वालिटी (Asset Quality) को बेहतर बनाने पर होगी। 31 मार्च 2026 तक बैंक का ग्रॉस एनपीए (Gross NPA) रेशियो 3.43% था, जिस पर बारीकी से नजर रखने की जरूरत है।
मुख्य जोखिम (Key Risks)
- सब्सिडियरी गवर्नेंस: BFIL में लगातार क्वालीफाइड ऑडिट ओपिनियन और लोन 'एवरग्रीनिंग' (Loan Evergreening) के पुराने आरोप, प्रतिष्ठा और परिचालन संबंधी जोखिम पैदा करते हैं।
- एसेट क्वालिटी: 3.43% ग्रॉस एनपीए पर लगातार नजर रखना महत्वपूर्ण है, खासकर माइक्रोफाइनेंस सेक्टर में तनाव को देखते हुए।
- नियामक जांच (Regulatory Oversight): पिछली अकाउंटिंग विसंगतियों के कारण SFIO जैसी एजेंसियों की जांच चल रही है, जिसके कारण अतिरिक्त कार्रवाई या अनुपालन आवश्यकताएं हो सकती हैं।
इंडस्ट्री से तुलना
आम तौर पर बैंकिंग सेक्टर की एसेट क्वालिटी में सुधार देखा गया है, जिसमें GNPA रेशियो सितंबर 2024 तक 2.6% के 12 साल के निचले स्तर पर पहुंच गया था। इसकी तुलना में, IndusInd Bank का 3.43% का GNPA रेशियो मार्च 2026 तक ऊंचा बना हुआ है। माइक्रोफाइनेंस सेक्टर, जहां BFIL काम करता है, की अपनी अलग चुनौतियां हैं, जहां औसत GNPA सितंबर 2024 तक बढ़कर 11.6% हो गया था। तुलना के लिए, Kotak Mahindra Bank जैसे बड़े बैंक ने FY24 में लगभग ₹13,800 करोड़ का नेट प्रॉफिट दर्ज किया था, जो IndusInd Bank के वार्षिक प्रदर्शन के बड़े अंतर को दर्शाता है।
