बैंक का आधिकारिक बयान
IndusInd Bank ने 30 मार्च 2026 को जारी एक प्रेस विज्ञप्ति (press release) में स्पष्ट किया है कि उन्हें सीरियस फ्रॉड इन्वेस्टिगेशन ऑफिस (SFIO) द्वारा कर्मचारियों को समन (summons) भेजे जाने की खबरों के संबंध में कोई आधिकारिक सूचना (official communication) प्राप्त नहीं हुई है। बैंक ने इस बात पर जोर दिया कि वे SFIO की जांच में पूरा सहयोग (cooperation) जारी रखेंगे, जैसा कि उन्होंने दिसंबर 2025 और जून 2025 में भी किया था।
जांच का दायरा और वित्तीय प्रभाव
SFIO की यह जांच बैंक की अकाउंटिंग पद्धतियों में गंभीर अनियमितताओं (accounting irregularities) पर केंद्रित है, जिसका अनुमानित वित्तीय प्रभाव ₹2,000 करोड़ से अधिक हो सकता है। हाल ही में, बैंक ने Q4 FY25 में ₹2,329 करोड़ का नेट लॉस (net loss) दर्ज किया था, जिसमें इन अकाउंटिंग मुद्दों के लिए प्रोविजन (provisions) और रिवर्सल (reversals) का बड़ा योगदान था।
आरोपों का विवरण
SFIO मुख्य रूप से बैंक के डेरिवेटिव्स (derivatives) पोर्टफोलियो और माइक्रोफाइनेंस (microfinance) बिजनेस से जुड़ी अकाउंटिंग गड़बड़ियों की जांच कर रहा है। FY16 से FY24 के बीच डेरिवेटिव्स के लेन-देन में विसंगतियां (discrepancies) पाई गई हैं, जिनसे नोटिनल इनकम (notional income) दर्ज हुई। माइक्रोफाइनेंस से मिलने वाले ब्याज और फीस की गलत पहचान (recognition) तथा कुछ ऋणों (loans) के गलत वर्गीकरण (classification) की भी शिकायतें हैं।
अन्य एजेंसियों की भूमिका
इस बीच, भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) भी बैंक के पूर्व CEO सुmant Kathpalia सहित कुछ वरिष्ठ अधिकारियों की आंतरिक व्यापार (insider trading) के आरोपों में जांच कर रहा है। यह जांच अकाउंटिंग गड़बड़ियों के सार्वजनिक होने से पहले किए गए शेयरों की बिक्री से जुड़ी है। वहीं, मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने अपनी शुरुआती जांच में फंड डायवर्जन (fund diversion) या गबन (siphoning) का कोई सबूत नहीं पाया है और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) से अंतिम स्पष्टीकरण मिलने के बाद अपनी जांच समाप्त करने के करीब है।
निवेशकों के लिए संदेश
बैंक का यह बयान कर्मचारियों के खिलाफ सीधे कार्रवाई की किसी भी आशंका को दूर करने का एक प्रयास है। हालांकि, यह समझना महत्वपूर्ण है कि SFIO की व्यापक जांच अभी जारी है और यह जारी नियामक जांच (regulatory scrutiny) निवेशकों की धारणा (investor sentiment) और बैंक के परिचालन (operations) पर असर डाल सकती है।
आगे क्या
निवेशक अब SFIO से किसी भी संभावित नए नोटिस या प्रत्यक्ष समन का इंतजार करेंगे। SEBI की जांच के नतीजे और RBI से EOW की पूछताछ पर मिलने वाला फीडबैक भी महत्वपूर्ण होंगे। इसके अतिरिक्त, बैंक को लिस्टिंग नियमों (listing regulations) के अनुसार किसी भी महत्वपूर्ण घटनाक्रम की समय पर जानकारी सार्वजनिक करनी होगी।