बोर्ड ने किए अहम नियुक्तियां
इंडसइंड बैंक ने 24 अप्रैल, 2026 को अपने निदेशक मंडल (Board of Directors) में चार नए सदस्यों को शामिल करने का फैसला किया है। इसमें दो नॉन-एग्जीक्यूटिव इंडिपेंडेंट डायरेक्टर्स और दो होल-टाइम (एग्जीक्यूटिव) डायरेक्टर्स शामिल हैं।
- Mr. Nilesh Shivji Vikamsey और Mr. Ravindra Babu Garikipati को नॉन-एग्जीक्यूटिव इंडिपेंडेंट डायरेक्टर के तौर पर नियुक्त किया गया है। उनका कार्यकाल चार-साल का होगा, जो 23 अप्रैल, 2030 तक प्रभावी रहेगा।
- वहीं, Mr. Ganesh Sankaran और Mr. Jagdeep Mallareddy को होल-टाइम (एग्जीक्यूटिव) डायरेक्टर के रूप में चुना गया है। इनका कार्यकाल तीन-साल की अवधि के लिए होगा, हालांकि RBI इस अवधि को अंतिम रूप देगा। ये दोनों डायरेक्टर, अपनी पूरी नियुक्ति के बाद, बैंक के की मैनेजरियल पर्सनल (KMPs) के तौर पर भी काम करेंगे।
इन नियुक्तियों का क्या है महत्व?
बैंक का यह कदम अपनी लीडरशिप टीम को मजबूत करने और कॉर्पोरेट गवर्नेंस के मानकों को ऊंचा उठाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है। नए और अनुभवी पेशेवरों के शामिल होने से बैंक को विविध दृष्टिकोण मिलेंगे, जिससे स्ट्रेटेजिक फैसलों और एफिशिएंसी में सुधार की उम्मीद है।
गवर्नेंस पर लगातार फोकस
इंडसइंड बैंक पिछले कुछ समय से अपनी गवर्नेंस पर खासा ध्यान दे रहा है। इसी कड़ी में, जनवरी 2026 में SBI के पूर्व MD Arijit Basu बैंक के नॉन-एग्जीक्यूटिव चेयरमैन बने थे। बैंक पहले भी बोर्ड में सदस्यों की संख्या बढ़ाकर लगभग बारह करने की योजना बना चुका है, ताकि ओवरसाइट और निर्णय लेने की प्रक्रिया को बेहतर बनाया जा सके। यह कदम कुछ समय पहले बैंक के डेरिवेटिव्स पोर्टफोलियो में हुई अकाउंटिंग गड़बड़ियों और उसके बाद SFIO व RBI की जांच के बाद उठाया गया है, जिसमें पूर्व CEO Sumant Kathpalia और CFO Gobind Jain को छोड़ना पड़ा था।
आगे क्या उम्मीद करें?
- बैंक के बोर्ड को नई विशेषज्ञता और लीडरशिप मिलेगी।
- नए डायरेक्टर्स से बेहतर ओवरसाइट और स्ट्रेटेजिक मार्गदर्शन की अपेक्षा है।
- एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर्स की नियुक्ति से सीनियर मैनेजमेंट टीम को मजबूती मिलेगी।
- यह सब कॉर्पोरेट गवर्नेंस में बेस्ट प्रैक्टिसेज अपनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
ज़रूरी मंजूरियां:
- इन नियुक्तियों को शेयरहोल्डर्स की मंजूरी की आवश्यकता होगी।
- एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर्स के कार्यकाल, अवधि और रेमुनरेशन (वेतन) को लेकर अंतिम फैसला RBI से लेना होगा।
