India Finsec ने FY26 के ऑडिटेड फाइनेंशियल नतीजे जारी किए हैं, जिनमें कंसोलिडेटेड परफॉर्मेंस और स्टैंडअलोन ऑपरेशन के बीच एक बड़ा अंतर देखने को मिला है।
Q4 FY26 में, कंपनी का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट ₹57.17 करोड़ रहा, जो पिछले साल की इसी अवधि में ₹45.72 करोड़ था। लेकिन, कंसोलिडेटेड रेवेन्यू ₹25.45 करोड़ पर आ गया, जो पिछले साल ₹71.15 करोड़ था। असली तस्वीर स्टैंडअलोन ऑपरेशन की है, जहां रेवेन्यू ₹26.54 लाख से गिरकर सिर्फ ₹0.88 लाख रह गया। इसके बावजूद, स्टैंडअलोन नेट प्रॉफिट ₹0.11 लाख से बढ़कर ₹20.44 लाख हो गया।
यह बड़ा अंतर कंपनी की स्ट्रैटेजिक शिफ्ट को दिखाता है। अब कंपनी का मुख्य बिजनेस सब्सिडियरीज से चल रहा है, जबकि स्टैंडअलोन ऑपरेशन्स का रेवेन्यू काफी कम हो गया है।
कंपनी की सब्सिडियरी, IFL Finance Ltd., अब हाउसिंग फाइनेंस कंपनी (HFC) से NBFC-ICC (Investment and Credit Company) बन गई है, जिसमें नाम भी बदला गया है। यह भविष्य की फाइनेंशियल सर्विसेज के लिए एक अहम कदम है। साथ ही, India Finsec रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) से एक अनरजिस्टर्ड कोर इन्वेस्टमेंट कंपनी (CIC) बनने की मंजूरी का इंतजार कर रही है, ताकि इन्वेस्टमेंट होल्डिंग स्ट्रक्चर को सरल बनाया जा सके।
कॉर्पोरेट गवर्नेंस को मजबूत करने के लिए, Ms. Prachi Bansal को 14 मई, 2026 से नई कंपनी सेक्रेटरी और कंप्लायंस ऑफिसर नियुक्त किया गया है। कंपनी ने M/s Himanshu Sunil & Associates को FY26-27 के लिए इंटरनल ऑडिटर भी नियुक्त किया है।
निवेशक इस बात पर नजर रखेंगे कि India Finsec का कम स्टैंडअलोन रेवेन्यू कितना टिकाऊ है और लंबी अवधि की स्ट्रैटेजी क्या है। नई NBFC-ICC सब्सिडियरी का प्रदर्शन ग्रुप की प्रॉफिटेबिलिटी के लिए अहम होगा। RBI से CIC एप्लीकेशन पर आने वाला फैसला एक बड़ा ट्रिगर हो सकता है। इसी तरह के बिज़नेस सरलीकरण का ट्रेंड दूसरे प्लेयर्स में भी दिख रहा है, जैसे Edelweiss Financial Services ने भी नॉन-कोर एसेट्स बेचकर अपने मुख्य सेगमेंट पर फोकस बढ़ाया है।
मार्च 2026 तक, सब्सिडियरी IFL Finance Ltd. का कुल एसेट्स ₹588.98 करोड़ और आउटस्टैंडिंग डेट ₹388.21 करोड़ था।
निवेशकों के लिए मुख्य फैक्टर RBI का CIC एप्लीकेशन पर फैसला, IFL Finance का NBFC-ICC के तौर पर प्रदर्शन और कंपनी के स्टैंडअलोन ऑपरेशन्स की भविष्य की योजनाएं होंगी।
