Q4 में उछाल, पर FY26 पर दिखी गिरावट की छाया
कंपनी ने 31 मार्च 2026 को समाप्त चौथी तिमाही के लिए अपने स्टैंडअलोन टोटल इनकम में 11.44% का सालाना उछाल दर्ज किया, जो ₹5.92 करोड़ रहा। इस बढ़त के दम पर Q4 का प्रॉफिट 6.66% बढ़कर ₹1.21 करोड़ हो गया, और प्रति शेयर आय (EPS) ₹0.27 दर्ज की गई।
इसके विपरीत, पूरे फाइनेंशियल ईयर 26 (FY26) के नतीजे कमजोर रहे। स्टैंडअलोन टोटल इनकम पिछले साल के ₹26.80 करोड़ की तुलना में 6.18% गिरकर ₹25.15 करोड़ पर आ गई। नतीजतन, पूरे साल का स्टैंडअलोन प्रॉफिट ₹8.46 करोड़ से 15.82% घटकर ₹7.12 करोड़ रह गया। पूरे साल के लिए EPS ₹1.61 रहा।
सकारात्मक पक्ष:
अच्छी बात यह है कि कंपनी के स्टैच्यूटरी ऑडिटर ने वित्तीय नतीजों पर क्लीन ऑडिट रिपोर्ट दी है। इसके अलावा, 31 मार्च 2026 तक कंपनी ने अपने सभी उधार (Borrowings) चुका दिए हैं, जिससे बैलेंस शीट मजबूत हुई है।
बड़े जोखिम जिन पर रहेगी नजर
हालांकि, कंपनी पर दो बड़े जोखिम मंडरा रहे हैं। सबसे बड़ी चिंता इनकम टैक्स विभाग की ओर से ₹18.43 करोड़ का पेंडिंग टैक्स डिमांड है, जिसके लिए कंपनी ने अब तक कोई प्रोविजन नहीं किया है। अगर कंपनी यह कानूनी लड़ाई हार जाती है, तो यह उसके मुनाफे को काफी प्रभावित कर सकता है।
एक और बड़ा चैलेंज ₹8.71 करोड़ के अनकोटेड निवेश (Unquoted Investments) को राइट-ऑफ करना है। यह इन संपत्तियों पर हुए कुल नुकसान को दर्शाता है।
कंपनी का बैकग्राउंड और कॉम्पिटिशन
Indbank Merchant Banking Services Ltd, जिसकी स्थापना 1989 में हुई थी, एक भारतीय वित्तीय सेवा फर्म है और यह पब्लिक सेक्टर बैंक इंडियन बैंक की सब्सिडियरी है। यह मर्चेंट बैंकिंग, स्टॉकब्रोकिंग और अन्य वित्तीय उत्पाद वितरण जैसी सेवाएं प्रदान करती है। यह JM Financial, BOBCAPS, Centrum Capital और Prime Securities Ltd जैसी कंपनियों के साथ प्रतिस्पर्धा करती है।
आगे क्या देखें?
निवेशकों की नजर अब इन प्रमुख बिंदुओं पर रहेगी:
- ₹18.43 करोड़ के इनकम टैक्स मुकदमे का क्या नतीजा निकलता है और इसमें कितना समय लगता है।
- कंपनी के मैनेजमेंट की वो स्ट्रेटेजी जो रेवेन्यू ग्रोथ को बढ़ा सके और वार्षिक प्रदर्शन में आई गिरावट को संभाला जा सके।
- कंपनी के निवेशों से जुड़े किसी और राइट-डाउन या प्रोविजन की घोषणा।
- क्या चौथी तिमाही में दिखे सकारात्मक ट्रेंड (तेजी) FY27 में भी जारी रह पाएगा।
