डूबत कर्ज ने बढ़ाई ISF Limited की मुश्किलें, FY26 में हुआ ₹1.66 करोड़ का भारी घाटा
ISF Limited के निवेशकों के लिए साल 2026 के नतीजे चिंताजनक रहे। कंपनी ने 31 मार्च, 2026 को समाप्त चौथी तिमाही (Q4 FY26) में ₹1.87 करोड़ का नेट लॉस रिपोर्ट किया है। पूरे वित्तीय वर्ष 2026 के लिए यह घाटा बढ़कर ₹1.66 करोड़ हो गया, जबकि FY25 में यह सिर्फ ₹0.65 लाख था।
रेवेन्यू में गिरावट और खर्चों में भारी बढ़ोतरी
FY26 की चौथी तिमाही में कंपनी का टोटल रेवेन्यू 15.18% घटकर ₹42.19 लाख रहा, जो पिछले साल की इसी अवधि में ₹49.74 लाख था। पूरे वित्तीय वर्ष की बात करें तो रेवेन्यू 5.07% घटकर ₹169.76 लाख रहा, जो FY25 में ₹178.83 लाख था। रेवेन्यू में इस गिरावट के साथ ही कंपनी के कुल खर्चे 119.45% बढ़कर ₹394.35 लाख तक पहुंच गए। इन बढ़े हुए खर्चों की मुख्य वजह डूबत और संदिग्ध कर्जों के लिए ₹272.45 लाख के प्रोविजन्स रहे।
बरोइंग्स घटीं, पर ऑडिटर्स की चिंताएं बरकरार
अच्छी खबर यह है कि 31 मार्च, 2026 तक कंपनी का कुल बरोइंग (कर्ज) घटकर ₹218.57 लाख रह गया, जो पिछले साल ₹340.35 लाख था। हालांकि, कंपनी के ऑडिटर ने वित्तीय नतीजों पर अनमोडिफाइड ओपिनियन (unmodified opinion) दिया है। पर, ऑडिटर्स ने लोन प्रोविजन्स की बड़ी राशि और पिछले साल के अनअप्रूव्ड खातों पर चिंता जताई है।
कंपनी का बिजनेस और इंडस्ट्री में स्थिति
ISF Limited इंफ्रास्ट्रक्चर और इंजीनियरिंग प्रोजेक्ट्स के लिए स्टील प्रोडक्ट्स बनाती और फैब्रिकेट करती है। कंपनी का नेट वर्थ (कुल इक्विटी) भी ₹1342.07 लाख से घटकर ₹1175.72 लाख रह गया है। कंपनी को पहले भी ऑर्डर बुक में उतार-चढ़ाव और वर्किंग कैपिटल मैनेजमेंट में दिक्कतों का सामना करना पड़ा है।
अगर तुलना करें तो इसी क्षेत्र की एक और कंपनी, Skipper Ltd, ने FY26 की चौथी तिमाही में लगभग ₹1,360 करोड़ का रेवेन्यू दर्ज किया था। ISF लिमिटेड का Q4 रेवेन्यू सिर्फ ₹0.42 करोड़ (या ₹42 लाख) रहा, जो दर्शाता है कि ISF बहुत छोटी इकाई है और मार्जिन पर दबाव का सामना कर रही है।
आगे की राह और निवेशकों के लिए अहम बिंदु
निवेशकों को कंपनी की एसेट क्वालिटी और प्रोविजनिंग नीतियों पर बढ़ी हुई निगरानी पर ध्यान देना चाहिए, जैसा कि ऑडिटर ने भी उजागर किया है। मैनेजमेंट पर कर्ज वसूली दरें सुधारने और खर्चों को कंट्रोल करने का दबाव है। कंपनी की वित्तीय स्थिति नाजुक है, जिसका असर उसकी इक्विटी पर दिख रहा है। आगामी एनुअल जनरल मीटिंग (AGM) में FY25 के खातों पर फैसला अहम होगा।