मुनाफे में आई बंपर तेजी, NPA का बोझ घटा
बैंक ने फाइनेंशियल ईयर 2026 (FY26) में अपनी संपत्ति की गुणवत्ता (Asset Quality) में सुधार पर काफी ध्यान दिया, जिसका असर नतीजों पर साफ दिख रहा है। पिछले साल के 2.14% के मुकाबले ग्रॉस नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (Gross NPAs) घटकर 1.42% रह गए। वहीं, नेट NPA ratio 0.21% पर स्थिर बना हुआ है।
कुल आय (Total Income) भी 11.45% बढ़कर ₹37,532.15 करोड़ हो गई, जो बैंक की ग्रोथ को दर्शाता है। कंसोलिडेटेड (Consolidated) आधार पर नेट प्रॉफिट ₹5,418.46 करोड़ रहा। चौथी तिमाही (Q4 FY26) के लिए भी बैंक ने ₹1,505.45 करोड़ का स्टैंडअलोन नेट प्रॉफिट दर्ज किया है।
लागत में बढ़ोतरी, पर कैपिटल रेशियो मजबूत
हालांकि, बैंक के कुल खर्च (Total Expenditure) में 10.08% की बढ़ोतरी हुई, जो ₹27,506.02 करोड़ तक पहुंच गया। लेकिन, बैंक का कैपिटल एडिक्वेसी रेशियो (CAR) 19.78% पर मजबूत बना हुआ है, जो भविष्य की ग्रोथ और रेगुलेटरी जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त है।
सेक्टर में सुधार और पीयर्स से तुलना
IOB का प्रदर्शन पब्लिक सेक्टर बैंक (PSB) सेक्टर में चल रहे सुधार का हिस्सा है। State Bank of India, Punjab National Bank और Bank of Baroda जैसे प्रमुख बैंकों ने भी बेहतर प्रॉफिट और एसेट क्वालिटी दर्ज की है। IOB का 1.42% का ग्रॉस NPA रेशियो और 19.78% का CAR इसे अपने पीयर्स (Peers) के मुकाबले प्रतिस्पर्धी स्थिति में रखता है।
निवेशकों के लिए आगे क्या?
निवेशकों की नजरें अब इस बात पर होंगी कि क्या बैंक अपनी लागत वृद्धि को आय वृद्धि के मुकाबले नियंत्रित कर पाता है और एसेट क्वालिटी में स्थिरता बनी रहती है। प्रमोटर की 92.44% हिस्सेदारी के कारण स्टॉक का फ्री फ्लोट (Free Float) सीमित है, जिस पर भी नजर रखी जाएगी।
सरकारी बैंक के तौर पर, सरकार की भविष्य की विनिवेश (Divestment) योजनाओं पर भी निवेशकों की नजर रहेगी।
