IOB का MCLR पर अहम ऐलान
इंडियन ओवरसीज बैंक (IOB) ने नए फाइनेंशियल ईयर की शुरुआत से पहले अपने ग्राहकों के लिए एक अहम घोषणा की है। बैंक ने Overnight, 1-Year और 2-Year टेन्योर वाले लोन के लिए अपनी मार्जिनल कॉस्ट ऑफ फंड्स बेस्ड लेंडिंग रेट (MCLR) को 5 बेसिस पॉइंट कम कर दिया है। यह नई दरें 15 अप्रैल 2026 से लागू हो जाएंगी।
नई दरें क्या होंगी?
इस बदलाव के बाद, बैंक की Overnight MCLR अब 7.90% हो जाएगी, जो पहले 7.95% थी। वहीं, 1-Year और 2-Year MCLR दोनों ही 8.75% पर आ जाएंगी, जबकि पहले ये 8.80% थीं। यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि 1-Month, 3-Month, 6-Month और 3-Year टेन्योर वाली लोन दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
ग्राहकों और बैंक पर क्या होगा असर?
MCLR में इस कटौती का सीधा मतलब है कि जिन ग्राहकों के लोन इन खास टेन्योर से जुड़े हुए हैं, उनकी ईएमआई (EMI) थोड़ी कम हो सकती है। बैंक के लिए, इस फैसले का सीधा असर उसके नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) पर पड़ेगा। बैंक को अपनी फंड की लागत और एसेट यील्ड को मैनेज करने पर खास ध्यान देना होगा।
RBI की दरें स्थिर, फिर भी IOB का फैसला
हालांकि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने फरवरी 2023 से अपनी पॉलिसी रेपो रेट 6.50% पर स्थिर रखी है, लेकिन बैंक जैसे IOB अपनी MCLR को स्वतंत्र रूप से एडजस्ट करते रहते हैं। यह कदम बैंक की अपनी फंड लागत, मार्केट लिक्विडिटी और प्रतिस्पर्धा को देखते हुए लिया गया है।
आगे क्या उम्मीद करें?
बाजार के जानकारों का कहना है कि इस कदम से IOB उन ग्राहकों को लुभाने की कोशिश कर रहा है जिनके लोन इन विशेष अवधियों से जुड़े हैं। वहीं, बैंक की आने वाली रिपोर्ट्स में इसके नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) पर पड़ने वाले प्रभाव पर बारीकी से नजर रखी जाएगी।
